नेपाल की राजधानी काठमांडू में हाल ही में एक रैली ने सुर्खियां बटोरीं, जब पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह के स्वागत में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पोस्टर लहराए गए। यह रैली राजशाही समर्थकों की ओर से थी, जो 2008 में जन आंदोलन के बाद खत्म हुई राजशाही को फिर से बहाल करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन योगी की तस्वीरों ने वहां हंगामा खड़ा कर दिया और मामला गरमा गया।
क्या है पूरा माजरा?
77 साल के ज्ञानेंद्र शाह हाल ही में देश के अलग-अलग धार्मिक स्थलों का दौरा करके लौटे थे। रविवार को जब वे पोखरा से सिमरिक एयर हेलीकॉप्टर से काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, तो सैकड़ों समर्थकों ने उनका जोर-शोर से स्वागत किया। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के नेता और कार्यकर्ता भी इस मौके पर मौजूद थे। सड़कों पर मोटरसाइकिलों के साथ लोग नारे लगाते हुए, ज्ञानेंद्र की तस्वीरें और राष्ट्रीय झंडे लिए नजर आए। लेकिन इसी बीच कुछ लोगों ने योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें भी उठा रखी थीं, जिसने विवाद को जन्म दे दिया।

क्यों मचा बवाल?
ज्ञानेंद्र के साथ योगी की तस्वीरें देखकर न सिर्फ राजनीतिक दलों, बल्कि आम लोगों ने भी सोशल मीडिया पर तीखी नाराजगी जताई। कई लोगों को यह समझ नहीं आया कि नेपाल के इस आंदोलन में एक भारतीय नेता की तस्वीर का क्या काम। इसकी आलोचना इतनी तेज हुई कि आरपीपी के प्रवक्ता ज्ञानेंद्र शाही को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने दावा किया कि यह सब प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार की साजिश है, जो राजशाही समर्थकों को बदनाम करना चाहती है। शाही ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ओली के मुख्य सलाहकार बिष्णु रिमल के कहने पर यह कदम उठाया गया।
ओली का जवाब और पलटवार
दूसरी ओर, बिष्णु रिमल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह सब गलत सूचना फैलाने की कोशिश है और इसे कुछ गैर-जिम्मेदार लोग अंजाम दे रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री ओली ने भी बिना योगी का नाम लिए तंज कसा। काठमांडू में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “हम अपनी रैलियों में विदेशी नेताओं की तस्वीरें नहीं लहराते।” उनका इशारा साफ था कि यह हरकत उनकी मंजूरी से नहीं हुई।
क्या है पृष्ठभूमि?
दरअसल, ज्ञानेंद्र शाह ने इस साल जनवरी में उत्तर प्रदेश का दौरा किया था और खबरों के मुताबिक, उस दौरान उनकी योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी हुई थी। नेपाल में पिछले कुछ दिनों से राजशाही की बहाली के लिए रैलियां हो रही हैं। काठमांडू और पोखरा जैसे शहरों में समर्थक सड़कों पर उतर रहे हैं और पुराने दिनों को वापस लाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन इस पूरे मामले में योगी की तस्वीर ने एक नया मोड़ ला दिया, जिससे बहस और गर्म हो गई।
अब आगे क्या?
यह घटना न सिर्फ नेपाल की सियासत में उथल-पुथल मचा रही है, बल्कि भारत-नेपाल के रिश्तों पर भी सवाल उठा रही है। लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इस तस्वीर के पीछे की मंशा क्या थी और क्या यह वाकई एक सोची-समझी चाल थी, या फिर महज एक संयोग। फिलहाल, दोनों देशों के लोग इस पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं, और सोशल मीडिया पर बहस थमने का नाम नहीं ले रही।
