WEST BENGAL चुनाव से ठीक पहले बड़ा कदम: मसौदा मतदाता सूची प्रकाशन से घंटों पहले EC ने हटाये गए मतदाताओं की सूची जारी की
WEST BENGAL: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले, एक बड़ी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील खबर सामने आई है। मसौदा मतदाता सूची (Draft Electoral Rolls) के औपचारिक प्रकाशन से ठीक कुछ घंटे पहले, 16 दिसंबर 2025 की सुबह, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) ने अपनी वेबसाइट पर हटाए गए मतदाताओं के नामों की सूची जारी कर दी।
यह कदम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत उठाया गया है, जिसे सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अंजाम दिया गया।
WEST BENGAL : हटाए गए मतदाताओं की सूची ऑनलाइन जारी
निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम 2025 की मतदाता सूची में थे, लेकिन 2026 की मसौदा सूची से हटा दिए गए हैं, उनकी सूची को सार्वजनिक कर दिया गया है।
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कहां देखें सूची: यह सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), पश्चिम बंगाल की आधिकारिक पोर्टल लिंक ceowestbengal.wb.gov.in/asd_sir पर उपलब्ध है।
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हटाए गए नामों की संख्या: आयोग के सूत्रों के अनुसार, 58 लाख से अधिक ऐसे नाम हैं जिन्हें ‘संग्रह न किए जा सकने वाले एसआईआर गणना फॉर्म’ के तहत चिह्नित किया गया था।
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हटाने के मुख्य आधार (Grounds for Deletion):
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पंजीकृत पते से अनुपस्थित रहना (Absent from their registered addresses)।
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स्थायी रूप से स्थानांतरित हो जाना (Permanently shifted)।
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मृत्यु (Dead)।
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एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में ‘डुप्लीकेट’ मतदाता के रूप में चिह्नित होना।
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आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन व्यक्तियों को लगता है कि उनके नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं, वे आपत्ति दर्ज करा सकते हैं:
“पीड़ित व्यक्ति मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक दावों और आपत्तियों को प्राप्त करने के लिए निर्धारित अवधि के दौरान घोषणा पत्र और सहायक दस्तावेजों के साथ फॉर्म 6 में अपने दावे प्रस्तुत कर सकते हैं।”
राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप
SIR प्रक्रिया को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल गर्म है।
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तृणमूल कांग्रेस का आरोप: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR अभ्यास का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और निर्वाचन आयोग विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में हेरफेर करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार किसी को भी बंगाल से बाहर नहीं निकालेगी और लोगों से अपील की है कि अगर उनका नाम हटा दिया जाता है, तो वे सड़कों पर उतरें।
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बीजेपी का दावा: वहीं, बीजेपी ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी का SIR के खिलाफ गुस्सा मुख्य रूप से अवैध प्रवासियों से बने अपने वोट बैंक की रक्षा के उद्देश्य से है।
यह एसआईआर अभ्यास पश्चिम बंगाल के अलावा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में भी चलाया जा रहा है।
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