Operation CyHawk : दो दिन में 944 करोड़ रुपये का पता लगा, भारत का सबसे बड़ा एंटी-साइबर फ्रॉड अभियान
Operation CyHawk –दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट ने भारत के संगठित डिजिटल धोखाधड़ी के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करते हुए एक अभूतपूर्व राष्ट्रव्यापी अभियान में 48 घंटों के भीतर ₹944 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का पता लगाया है। इस विशाल ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन साईहॉक 2.0’ (Operation CyHawk 2.0) नाम दिया गया, जिसने देश के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क की वित्तीय नब्ज पर सीधा प्रहार किया।
यह कार्रवाई पारंपरिक धोखेबाजों या कॉल सेंटरों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, साइबर अपराध को बनाए रखने वाले अदृश्य ‘वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र’ को निशाना बनाने पर केंद्रित थी।
Operation CyHawk : कैसे किया गया ₹944 करोड़ का पता?
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के साथ मिलकर दिल्ली पुलिस के खुफिया संलयन और रणनीतिक संचालन (Intelligence Fusion and Strategic Operations – IFSO) यूनिट ने इस जटिल नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
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डेटा-आधारित ब्लू प्रिंट: इस ऑपरेशन की शुरुआत नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 4,058 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों के गहन डेटा विश्लेषण से हुई।
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AI और एनालिटिक्स का उपयोग: उन्नत एनालिटिक्स (Advanced Analytics) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके इन शिकायतों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे निम्नलिखित पैटर्न की पहचान हुई:
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बार-बार होने वाले लेन-देन के पैटर्न।
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तेज गति से पैसों का घूमना (High-velocity money movement)।
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धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खाते (Mule Bank Accounts)।
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बार-बार इस्तेमाल होने वाले बिचौलिए और लाभार्थी खाते।
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वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाना: विश्लेषण से पता चला कि चोरी किए गए पैसे को तेजी से घुमाने और छिपाने के लिए एक जटिल और व्यवस्थित तरीका अपनाया जा रहा था। यह पैसा अक्सर छात्रों, मजदूरों और ग्रामीण निवासियों के नाम पर खोले गए ‘म्यूल खातों’ के माध्यम से घूमता था, जिसे बाद में पता लगने से बचने के लिए क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था।
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बैंकों की मदद: बैंकिंग खुफिया इनपुट और फिनटेक डेटा की सहायता से, जांचकर्ताओं ने परतों में छिपे ₹944 करोड़ के प्रवाह को ट्रैक किया। कई संदिग्ध खातों को फ्रीज कर दिया गया, जिससे संगठित अपराध की वित्तीय रीढ़ टूट गई।
10 राज्यों में एक साथ छापेमारी
ऑपरेशन साईहॉक 2.0 में लगभग 1000 से अधिक गिरफ्तारी की गईं और 1,736 से अधिक संदिग्धों को नोटिस जारी किए गए। यह कार्रवाई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे 10 राज्यों में एक साथ समन्वित तरीके से की गई।
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मुख्य लक्ष्य: टीमों ने ‘म्यूल अकाउंट’ चलाने वाले ऑपरेटरों, नकदी एकत्र करने वाले बिंदुओं (Cash Collection Points), फर्जी सिम कार्ड वितरकों और डिजिटल भुगतान सुविधा प्रदाताओं को निशाना बनाया।
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फर्जी कॉल सेंटर: इस दौरान सराय रोहिल्ला में चल रहे एक 32-सदस्यीय फर्जी कॉल सेंटर का भी भंडाफोड़ किया गया, जो विदेशी नागरिकों को एप्पल डिवाइस सपोर्ट एक्जीक्यूटिव बनकर निशाना बना रहा था।
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इंटरनेशनल लिंक: जांच में सामने आया कि ये घरेलू धोखाधड़ी गिरोह दक्षिण पूर्व एशिया और अन्य विदेशी साइबर सिंडिकेट्स के साथ जुड़े हुए थे।
दिल्ली पुलिस ने इस ऑपरेशन को “प्रतिक्रियाशील पुलिसिंग से वित्तीय व्यवधान (Financial Disruption) की ओर एक रणनीतिक बदलाव” बताया है, जिसका लक्ष्य साइबर अपराधियों के पैसे के नेटवर्क को खत्म करना है।
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