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TMC के निलंबित विधायक ने रखी ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव

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TMC के निलंबित विधायक ने रखी ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव

तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने आज, 6 दिसंबर को, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम से प्रस्तावित एक नई मस्जिद की नींव रखी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर पूरे देश में संवेदनशीलता बनी हुई है।

इस पूरे मामले में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की ‘चुप्पी’ और अप्रत्यक्ष सहमति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) ने जनहित याचिका (PIL) पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य प्रशासन पर छोड़ दी थी, जिसके बाद सरकार की निष्क्रियता पर विरोधी दलों ने तीखा हमला बोला है।


TMC विधायक का ‘विवादित’ कदम और बंगाल सरकार की ‘मिलीभगत’

TMC द्वारा 4 दिसंबर को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किए जाने के बावजूद, हुमायूं कबीर ने न केवल अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया, बल्कि प्रशासन ने भी उन्हें नहीं रोका।

  • सरकार पर आरोप: विपक्षी दल, विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP), सीधे आरोप लगा रही है कि राज्य सरकार अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण के लिए जानबूझकर विधायक को यह संवेदनशील कार्यक्रम आयोजित करने दे रही है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “TMC दोहरा खेल खेल रही है। पहले उन्होंने ‘दिखावे’ के लिए कबीर को निलंबित किया, और अब प्रशासन को आदेश दिया है कि वह शांति भंग करने वाले इस कार्यक्रम को होने दे। यह तुष्टिकरण की राजनीति है।

  • कोर्ट का फैसला, सरकार पर दबाव: हाई कोर्ट ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर छोड़ी थी। इसके बावजूद, सरकार ने शिलान्यास पर रोक लगाने का कोई स्पष्ट प्रयास नहीं किया, बल्कि मुर्शिदाबाद में केवल पुलिस बल की तैनाती तक सीमित रही।

  • ममता बनर्जी की ‘चुप्पी’: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या उनके किसी वरिष्ठ मंत्री की ओर से इस विवादित कार्यक्रम के नामकरण और शिलान्यास की तारीख पर कोई कड़ी निंदा या आपत्ति नहीं दर्ज की गई है, जो राजनीतिक गलियारों में राज्य सरकार की ‘अप्रत्यक्ष सहमति’ के तौर पर देखी जा रही है।


मुर्शिदाबाद में हाई अलर्ट: प्रशासन की ‘निश्चित’ कार्रवाई पर सवाल

विधायक हुमायूं कबीर ने खुले तौर पर चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें रोका गया तो लाखों लोग राष्ट्रीय राजमार्ग-12 (NH-12) को जाम कर सकते हैं। इस धमकी के बावजूद, प्रशासन ने बल प्रयोग करने के बजाय कार्यक्रम को ‘सुरक्षित’ ढंग से आयोजित होने दिया।

  • भारी पुलिस बल ‘निष्क्रिय’: शिलान्यास स्थल पर 3,000 से अधिक पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय बलों को तैनात किया गया था, लेकिन उनकी भूमिका केवल ‘दर्शक’ तक सीमित रही।

  • कबीर का हमला जारी: निलंबन के बाद विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री पर हमला करते हुए कहा था कि TMC अल्पसंख्यकों को धोखा दे रही है और उसकी RSS-BJP से मिलीभगत है। इन उग्र बयानों के बावजूद, राज्य सरकार ने उनके खिलाफ कोई कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है।

यह घटना पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकती है। राज्य सरकार पर अब दबाव है कि वह स्पष्ट करे कि क्या वह एक निलंबित विधायक द्वारा आयोजित, सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील नाम वाले इस कार्यक्रम का समर्थन करती है।


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