हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भूस्खलन
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल में मंगलवार शाम को एक भीषण भूस्खलन ने तबाही मचाई। जंगमबाग क्षेत्र में बीबीएमबी कॉलोनी के पास पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया, जिसके मलबे में दो मकान दब गए। इस हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
रेस्क्यू टीमों की तैनाती – सेना, NDRF और SDRF की टीम मौके पर मौजूद, फंसे लोगों को निकालने का अभियान जारी।
सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), जिला पुलिस और होमगार्ड की टीमें राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटी हुई हैं।
मंगलवार शाम करीब 6 बजे सुंदरनगर के जंगमबाग क्षेत्र में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें नीचे गिरने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से पहले पहाड़ से जोरदार गर्जना की आवाजें सुनाई दीं, और देखते ही देखते मलबे ने दो मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे की तीव्रता इतनी थी कि आसपास के लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागे, जिससे क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। मलबे में दबे लोगों में एक मां और उनकी तीन-चार साल की बेटी, एक बुजुर्ग महिला, और अन्य लोग शामिल थे।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक मकान में चार लोग और दूसरे में दो लोग मौजूद थे। बचाव कार्य के दौरान मंगलवार रात तक तीन शव बरामद किए गए, जिनमें एक मां, उनकी बेटी और एक स्कूटर सवार शामिल था। बुधवार सुबह तक मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई। इसके अलावा, एक टाटा सूमो वाहन के मलबे में दबे होने की भी सूचना है, जिसकी तलाश जारी है।
राहत और बचाव कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही मंडी जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। मंडी के उपायुक्त (डीसी) अपूर्व देवगन, एसडीएम सुंदरनगर अमर नेगी, तहसीलदार अंकित शर्मा, और सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्वाल घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्यों की निगरानी शुरू की। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ NDRF, SDRF, और होमगार्ड की टीमें मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
बचाव कार्य में चार से पांच जेसीबी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, और स्थानीय लोग भी इसमें सहयोग दे रहे हैं। हालांकि, बार-बार खिसकते पत्थरों और अस्थिर भूभाग के कारण बचावकर्मियों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खराब मौसम और रात के अंधेरे ने भी राहत कार्यों को और जटिल बना दिया। फिर भी, टीमें रात भर काम करती रहीं ताकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द निकाला जा सके।
मंडी के डीसी अपूर्व देवगन ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद दी जा रही है। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। बचाव कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा है, और हम किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरत रहे।”
प्रभाव और नुकसान

इस भूस्खलन ने न केवल मानवीय क्षति पहुंचाई, बल्कि क्षेत्र की बुनियादी संरचना को भी प्रभावित किया। आसपास की सड़कों पर मलबा फैलने से यातायात बाधित हुआ है, और कुछ क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। हिमाचल प्रदेश में मानसून के इस सीजन में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसके कारण पूरे राज्य में तबाही का मंजर है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाल ही में राज्य को “आपदाग्रस्त” घोषित किया है, और राहत कार्यों के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता की मांग की गई है। मंडी जिला इस मानसून सीजन में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक रहा है, जहां सड़कों, पुलों, और पेयजल योजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।
स्थानीय और सरकारी प्रतिक्रिया
सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्वाल ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “यह एक दुखद घटना है। हमारी टीमें दिन-रात काम कर रही हैं ताकि लापता लोगों को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके।” उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए।
स्थानीय लोग और स्वयंसेवी संगठन भी राहत कार्यों में सहयोग दे रहे हैं। कुछ संगठनों ने प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता के लिए बैंक खाते खोले हैं, ताकि बेघर हुए लोगों को तत्काल मदद पहुंचाई जा सके।
मौसम की चेतावनी
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के कई जिलों, विशेष रूप से मंडी, कुल्लू, चंबा, और शिमला में भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है। लोगों से नदियों, नालों, और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेने और सावधानी बरतने की सलाह दी है।
हिमाचल प्रदेश में इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं मानसून के दौरान आम हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इनकी तीव्रता और आवृत्ति बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध निर्माण कार्य इन आपदाओं को और गंभीर बना रहे हैं। मंडी जिले में हुए इस भूस्खलन ने एक बार फिर सरकार और समाज के सामने आपदा प्रबंधन और दीर्घकालिक योजना की जरूरत को उजागर किया है।
प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय और आवश्यक सामग्री प्रदान करने की व्यवस्था शुरू कर दी है। साथ ही, मृतकों के परिजनों को मुआवजे और अन्य सहायता देने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी।
