नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 हिंदुओं की निर्मम हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में भारी तनाव पैदा हो गया है। इस हमले के पीछे पाकिस्तानी साजिश की बात सामने आ रही है, जिसके चलते भारत ने अपनी सेनाओं को खुली छूट दे दी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच हालात युद्ध जैसे बन गए हैं। इस बीच पाकिस्तान ने अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए चीन की मदद लेना शुरू कर दिया है।
चीन की सैटेलाइटों से निगरानी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान अब चीन द्वारा लॉन्च की गई सैटेलाइटों की मदद से भारत की सैन्य गतिविधियों पर नजर रख रहा है। इसमें चीन की रिमोट सेंसिंग और संचार सैटेलाइटें शामिल हैं जो पाकिस्तान को हर मौसम और हर समय निगरानी की सुविधा दे रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सैटेलाइटों की मदद से पाकिस्तान सीमावर्ती इलाकों में भारतीय सैन्य मूवमेंट्स की जानकारी जुटा रहा है और अपने रक्षा नेटवर्क को मजबूत कर रहा है।
कौन-कौन सी सैटेलाइटें दे रहीं पाकिस्तान को मदद
- PRSS-1 (2018): यह एक ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट है जो दिन-रात निगरानी में सक्षम है और बादलों के बीच भी तस्वीरें ले सकता है। इसका उपयोग पाकिस्तान सीमा की निगरानी के अलावा कृषि, शहरी विकास और आपदा प्रबंधन में भी किया जाता है।
- PAKSAT MM1 (2024): यह एक मल्टी-मिशन संचार सैटेलाइट है जो C, Ku, Ka बैंड में सेवाएं देता है। इससे पाकिस्तान की सैन्य संचार प्रणाली को स्थायित्व और गति मिलती है। इसका इस्तेमाल ब्रॉडबैंड, टेली-मेडिसिन और ई-गवर्नेंस में भी हो रहा है।
- PRSC-EO1 (2025): यह पाकिस्तान का पहला स्वदेशी रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट है जिसे चीन ने लॉन्च किया। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी और कृषि विकास है, लेकिन इसके जरिए सैन्य निगरानी भी की जा सकती है।
भारत की मजबूती
भारत अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। भारत के पास 43 से अधिक सक्रिय सैटेलाइट हैं, जिनमें कई सैन्य उद्देश्यों से जुड़े हैं। भारत के पास RISAT (Radar Imaging Satellite) जैसे उन्नत सैटेलाइट हैं जो किसी भी मौसम में और रात में भी सटीक निगरानी कर सकते हैं। 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक्स में इन्हीं सैटेलाइटों ने भारत की रणनीति को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
पाकिस्तान-चीन गठजोड़: नई चिंता
पाकिस्तान और चीन के रिश्ते पहले से ही ‘ऑल वेदर फ्रेंडशिप’ के रूप में जाने जाते हैं। अब चीन की तकनीकी मदद से पाकिस्तान न केवल अपनी सीमाओं की निगरानी को बढ़ा रहा है, बल्कि सैन्य संचार के मोर्चे पर भी खुद को मजबूत कर रहा है। यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से चिंता का विषय बनता जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब सीमा पर तनाव चरम पर है।
