भारत में पहला ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप: 2025 के अंत तक बड़ा मील का पत्थर
नई दिल्ली, 25 अगस्त 2025: भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में एक ऐतिहासिक मोड़ आने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में घोषणा की है कि देश का पहला स्वदेशी ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप इस साल के अंत यानी दिसंबर 2025 तक बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। यह खबर न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाली है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 23 अगस्त 2025 को एक कार्यक्रम में कहा, “भारत का पहला मेड इन इंडिया सेमीकंडक्टर चिप वर्ष के अंत तक तैयार हो जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि देश 6G तकनीक पर काम कर रहा है, जो भविष्य की डिजिटल क्रांति का आधार बनेगी। सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भी पुष्टि की है कि यह चिप असेंबली लाइनों से दिसंबर तक रोल आउट हो जाएगी। यह चिप 28 से 90 नैनोमीटर तकनीक पर आधारित होगी, जो विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों जैसे मोबाइल, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होगी।
पृष्ठभूमि और महत्व
भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर चिप्स के आयात पर निर्भर रहा है, जो मुख्य रूप से ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका से आते हैं। वैश्विक चिप की कमी के दौरान महामारी ने इस निर्भरता को उजागर कर दिया था। अब, सरकार की ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत, देश में कई फैब्रिकेशन प्लांट्स (फैब्स) स्थापित हो रहे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में घोषित किया गया था कि पहला स्वदेशी चिप इस वर्ष उत्पादन के लिए तैयार हो जाएगा।
यह उपलब्धि न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी। सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक तकनीक का दिल हैं, जो AI, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और डिफेंस सिस्टम्स में इस्तेमाल होते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत जल्द ही 100 देशों को इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात करेगा, और यह चिप EV सेक्टर को बूस्ट देगी।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स और निवेश
- टाटा-टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स प्लांट: गुजरात के धोलावीरा में 11 अरब डॉलर का निवेश, जो 2025 के अंत तक चिप उत्पादन शुरू करेगा।
- माइक्रोन टेक्नोलॉजी: गुजरात में सबसे बड़ा चिप पैकेजिंग प्लांट, जो 2.75 अरब डॉलर का है।
- सरकारी प्रोत्साहन: 76,000 करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर इंसेंटिव स्कीम, जो विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चिप बाजार में आने से भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनेगी। हालांकि, चुनौतियां बनी हुई हैं, जैसे कुशल श्रमिकों की कमी और ऊर्जा आपूर्ति। लेकिन सरकार का लक्ष्य 2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करना है।
भविष्य की संभावनाएं
इस चिप के लॉन्च से भारत न केवल आयात कम करेगा, बल्कि निर्यात भी बढ़ाएगा। 6G पर काम तेजी से चल रहा है, जो 5G से 100 गुना तेज होगा। पीएम मोदी ने युवाओं से अपील की कि वे इस क्षेत्र में योगदान दें।
यह खबर भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता का प्रतीक है। जैसे-जैसे 2025 का अंत नजदीक आ रहा है, दुनिया भारत की ओर टकटकी लगाए देख रही है। क्या यह चिप भारत को सेमीकंडक्टर सुपरपावर बना देगी? समय ही बताएगा, लेकिन शुरुआत शानदार है।
