16 नवंबर 2025 : बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव के परिवार के आंतरिक कलह ने एक नया मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने शनिवार को राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान कर सबको चौंका दिया। इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भावुक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लालू परिवार को अपना परिवार बताते हुए कहा कि तेजस्वी यादव उनके भाई जैसे हैं और रोहिणी उनकी बहन की तरह। साथ ही, उन्होंने परिवार के विवाद के जल्द समाधान की प्रार्थना की।
चिराग पासवान ने पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, क्योंकि जब एक परिवार ऐसी कठिन परिस्थितियों से गुज़रता है तो वो किस मानसिक दबाव से गुज़र रहा है, इसका अंदाज़ा मुझे है।” पासवान ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद लालू परिवार के प्रति अपने लगाव को जाहिर किया। उन्होंने आगे कहा, “हम लोगों के राजनीतिक मतभेद ज़रूर रहे हैं, पर मैंने हमेशा लालू जी के परिवार को अपना परिवार माना है। मैंने हमेशा तेजस्वी, तेज, मीसा दी, रोहिणी जी, सबको अपना भाई-बहन ही माना है। ऐसे में बस मैं इतनी प्रार्थना करता हूं कि जल्द से जल्द ये पारिवारिक विवाद सुलझे।”
पासवान का यह बयान बिहार की राजनीति में एक दुर्लभ उदाहरण है, जहां विपक्षी दलों के नेता एक-दूसरे के परिवार के निजी दुख-सुख में इतनी संवेदनशीलता दिखा रहे हैं। उन्होंने परिवार की एकता पर जोर देते हुए कहा, “घर में एकता बनी रहती है तो इंसान बाहर कठिन परिस्थितियों से लड़ लेता है। लेकिन, आज के तारीख़ में उनकी पार्टी जिस दौर से गुज़र रही है और उसके बाद ऐसी कलह… मैं समझ सकता हूं कि परिवार काफ़ी कठिन परिस्थितियों से गुज़र रहा होगा।” यह बयान आरजेडी की मौजूदा अस्थिरता को भी रेखांकित करता है, जहां हाल के दिनों में पार्टी के भीतर कई विवादास्पद घटनाएं सामने आई हैं।
रोहिणी आचार्य का चौंकाने वाला ऐलान
रोहिणी आचार्य, जो लालू यादव की सबसे बड़ी बेटी हैं और परिवार की राजनीतिक विरासत का हिस्सा मानी जाती थीं, ने शनिवार को सोशल मीडिया के माध्यम से अपना फैसला सार्वजनिक किया। उन्होंने न केवल राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की, बल्कि परिवार से भी दूरी बनाने की बात कही। रोहिणी ने अपने बयान में तेजस्वी यादव (आरजेडी नेता और लालू के छोटे बेटे), उनके क़रीबी सहयोगी संजय यादव और एक अन्य व्यक्ति रमीज़ पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने लिखा, “मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था और मैं सारा दोष ख़ुद पर ले रही हूं।” रोहिणी का यह बयान परिवार के आंतरिक कलह को उजागर करता है, जो लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। यादव परिवार की राजनीतिक सक्रियता में रोहिणी की भूमिका सीमित रही है, लेकिन उनका यह कदम पार्टी और परिवार दोनों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
परिवार और पार्टी की चुप्पी
अब तक इस मामले में संजय यादव और रमीज़ की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। संजय यादव, जो तेजस्वी के करीबी माने जाते हैं, बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरा हैं। वहीं, रमीज़ के बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन रोहिणी के आरोपों ने उनके नाम को सुर्खियों में ला दिया है। लालू प्रसाद यादव के परिवार की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लालू यादव खुद स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली में हैं, जबकि तेजस्वी यादव पटना में पार्टी के मामलों में व्यस्त हैं।
आरजेडी के एक वरिष्ठ नेता मृत्युंजय तिवारी ने इस मामले पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह एक पारिवारिक मामला है। इस पर परिवार के लोग या पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जवाब देगा।” तिवारी का यह बयान स्पष्ट करता है कि पार्टी इस मुद्दे को आंतरिक रखने की कोशिश कर रही है, ताकि राजनीतिक नुकसान न हो।
यादव परिवार का राजनीतिक सफर और चुनौतियां
लालू प्रसाद यादव का परिवार बिहार की राजनीति का एक प्रमुख केंद्र रहा है। लालू के जेल जाने के बाद उनके बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी ने पार्टी की कमान संभाली, जबकि बेटियां मीसा भारती (सांसद) और रोहिणी आचार्य ने भी समय-समय पर सक्रियता दिखाई। रोहिणी को अक्सर परिवार की ‘पीछे से समर्थन’ देने वाली माना जाता था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में परिवार के भीतर मतभेदों की खबरें आती रहीं, खासकर तेज प्रताप के विवाह और पार्टी टिकट वितरण जैसे मुद्दों पर।
आरजेडी हाल ही में बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है, जहां नीतीश कुमार की जेडीयू और भाजपा गठबंधन का सामना करना है। ऐसे में यह पारिवारिक विवाद पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रोहिणी का फैसला अगर और गहराया, तो यह तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता पर भी असर डाल सकता है।
चिराग पासवान का बयान इस संकट के बीच एक सकारात्मक नोट जोड़ता है। पासवान, जो खुद रामविलास पासवान के बेटे हैं और बिहार में दलित वोट बैंक के प्रमुख नेता माने जाते हैं, ने हमेशा लालू परिवार के प्रति सम्मान दिखाया है। 2019 के लोकसभा चुनावों में उनके बीच तीखी टक्कर हुई थी, लेकिन निजी स्तर पर संबंधों का सम्मान बरकरार रहा।
आगे क्या?
यह विवाद कितना गहराएगा, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन चिराग पासवान की प्रार्थना की तरह, अगर परिवार जल्द एकजुट हो गया, तो बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा जा सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें लालू परिवार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या तेजस्वी या लालू खुद इस पर बोलेंगे? या यह मुद्दा चुपचाप सुलझ जाएगा? आने वाले दिनों में और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
