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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: एनडीए की ऐतिहासिक जीत, नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: एनडीए की ऐतिहासिक जीत, नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री

15 नवंबर 2025: बिहार की राजनीति में एक बार फिर नीतीश कुमार का जलवा दिखा। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 243 सीटों वाली विधानसभा में 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया है। जनता दल (यूनाइटेड) के नेतृत्व में बनी इस गठबंधन सरकार ने विपक्षी महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) को बुरी तरह करारी शिकस्त दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब दसवीं बार शपथ लेंगे, जो उनके लंबे राजनीतिक सफर का एक नया अध्याय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए की यह जीत न केवल बिहार के विकास मॉडल की मुहर लगाती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष को झकझोरने वाली साबित हो रही है।

एनडीए का जलवा: जेडीयू सबसे आगे, बीजेपी का दमदार प्रदर्शन

चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एनडीए ने कुल 202 सीटें हासिल की हैं, जो बहुमत के आंकड़े (122) से कहीं ज्यादा है। इसमें जनता दल (यूनाइटेड) को 89 सीटें मिलीं, जो 2020 के 43 से दोगुनी से ज्यादा हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 78 सीटें जीतीं, जबकि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान को 25 सीटें हासिल हुईं। इसके अलावा, अन्य सहयोगी दलों जैसे राष्ट्रीय लोक मोर्चा और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को भी कुछ सीटें मिलीं।

यह जीत एनडीए के लिए 20 सालों में सबसे बड़ी है। 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने 143 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार का प्रदर्शन उससे भी ऊपर है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं और युवाओं के बीच एनडीए की योजनाओं ने ‘महिला-युवा’ (एमवाई) फॉर्मूला काम किया, जो पुराने ‘मुस्लिम-यादव’ (एमवाई) समीकरण को तोड़ने में सफल रहा।

महागठबंधन का सफाया: तेजस्वी की उम्मीदें चूर, निष्पक्षता पर सवाल

वहीं, महागठबंधन को कुल 41 सीटें ही नसीब हुईं। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को महज 22 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 3। अन्य सहयोगी दल जैसे वामपंथी पार्टियां और अन्य छोटे दलों को बिखरी हुई कुछ सीटें मिलीं। तेजस्वी यादव ने परिणामों को “चौंकाने वाला” बताते हुए चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “यह जनादेश नहीं, बल्कि वोट चोरी का नतीजा है। हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।” तेजस्वी रघोपुर सीट से तीसरी बार जीते, लेकिन उनकी पार्टी का प्रदर्शन 2020 के 75 सीटों से आधा रह गया।

कांग्रेस में हार के बाद हंगामा मच गया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बैठक बुलाई गई, जहां राहुल गांधी ने “वोटर लिस्ट में गड़बड़ी” का आरोप लगाया। पूर्व स्ट्रैटेजिस्ट प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली, जो उनके लिए बड़ा झटका है।

पीएम मोदी का तंज: कांग्रेस में फूट की भविष्यवाणी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की जीत को “ऐतिहासिक जनादेश” बताते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा, “बिहार की जनता ने विकास, सुशासन और एकता पर भरोसा जताया है। महिलाओं और युवाओं की आकांक्षाओं ने पुरानी राजनीति को पीछे छोड़ दिया।” लेकिन उनका एक बयान विपक्ष को और चुभ गया: “कांग्रेस में जल्दी फूट पड़ सकती है। उनकी हार ने उनकी आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है।” यह बयान महागठबंधन की कमजोरी पर केंद्रित था, जहां कांग्रेस का प्रदर्शन फिर से निराशाजनक रहा।

चिराग पासवान की नीतीश से मुलाकात: डिप्टी सीएम की अटकलें तेज

चुनाव परिणामों के ठीक बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। यह मुलाकात पटना के मुख्यमंत्री आवास पर हुई, जहां चिराग ने एनडीए की जीत पर बधाई दी। मुलाकात के बाद चिराग ने कहा, “नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे, इसमें कोई शक नहीं। एनडीए की एकता ही हमारी ताकत है।” हालांकि, राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि चिराग के बढ़ते कद के चलते उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद मिल सकता है। 2020 में मात्र 1 सीट जीतने वाली उनकी पार्टी इस बार 25 सीटें ले आई, जो दलित और युवा वोट बैंक में उनकी पकड़ दिखाती है।

जीत के पीछे की रणनीति: महिलाओं का ‘महा-वोट’, कल्याणकारी योजनाओं का जादू

एनडीए की जीत के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारक महिलाओं का भारी मतदान रहा। 67.13% रिकॉर्ड वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी 70% से ऊपर रही। नीतीश सरकार की योजनाएं जैसे महिलाओं को मासिक भत्ता, छात्रवृत्ति, और बेरोजगारी भत्ता ने उन्हें आकर्षित किया। एक समय फ्रीबीज का विरोध करने वाले नीतीश ने इस बार इन्हें ही हथियार बनाया – टैबलेट वितरण से लेकर स्मार्टफोन तक।

प्रधानमंत्री मोदी का आक्रामक प्रचार अभियान भी अहम रहा। उन्होंने आरजेडी पर “जंगल राज” का पुराना तंज कसते हुए 50 से ज्यादा रैलियां कीं। बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर एनडीए ने रोजगार सृजन का वादा किया, जो विपक्ष के जातिवादी एजेंडे को फीका कर गया। जातिगत जनगणना का वादा सभी दलों ने किया, लेकिन एनडीए की एकजुटता ने फायदा उठाया।

भविष्य की तस्वीर: दसवीं शपथ, लेकिन चुनौतियां बरकरार

नीतीश कुमार की दसवीं शपथ समारोह अगले कुछ दिनों में हो सकता है। एनडीए के अंदर सीट बंटवारे पर सहमति बन चुकी है, लेकिन बीजेपी की मजबूत स्थिति से नीतीश पर दबाव बढ़ सकता है। राज्यपाल से मिलने के बाद शपथ ग्रहण की तारीख तय होगी। विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने निष्पक्षता का दावा किया है।

बिहार की यह जीत एनडीए के लिए बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रेरणा बनेगी। लेकिन बेरोजगारी, प्रवासन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे नई सरकार के लिए चुनौती बने रहेंगे। नीतीश कुमार ने कहा, “यह जनता का विश्वास है, हम इसे और मजबूत करेंगे।” बिहार एक बार फिर विकास की राह पर अग्रसर है, लेकिन सवाल यह है कि यह गठबंधन कितना लंबा चलेगा?

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