भारत में 14वें उपराष्ट्रपति vice president का चुनाव

नई दिल्ली, 9 सितंबर 2025: आज भारत के संसद भवन में देश के 14वें उपराष्ट्रपति vice president के चयन के लिए मतदान हो रहा है। यह चुनाव न केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया है, बल्कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी इंडिया ब्लॉक के बीच एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। पूर्व उपराष्ट्रपति vice president जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के बाद यह चुनाव समय से पहले कराया जा रहा है।
उम्मीदवार और गठबंधन
एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु के वरिष्ठ भाजपा नेता सीपी राधाकृष्णन को अपना vice president उम्मीदवार बनाया है। राधाकृष्णन को उनकी संगठनात्मक निष्ठा और दक्षिण भारत में भाजपा की पैठ बढ़ाने की रणनीति के हिस्से के रूप में चुना गया है। दूसरी ओर, इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और तेलंगाना के बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है। रेड्डी अपनी निष्पक्ष और ईमानदार छवि के लिए जाने जाते हैं, और विपक्ष उन्हें संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने वाले उम्मीदवार के रूप में पेश कर रहा है।
मतदान प्रक्रिया
उपराष्ट्रपति vice president का चुनाव संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। कुल 782 सांसद मतदान के लिए पात्र हैं, जिसमें 542 लोकसभा और 240 राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं। जीत के लिए उम्मीदवार को 392 वोटों का बहुमत चाहिए। मतदान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संसद भवन के वसुधा हॉल (कमरा संख्या एफ-101) में होगा, और परिणाम देर शाम तक घोषित होने की उम्मीद है।
चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली के तहत होता है, जिसमें सांसद अपनी प्राथमिकता के आधार पर वोट देते हैं। यदि कोई उम्मीदवार पहली गिनती में बहुमत हासिल नहीं करता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार के वोटों को दूसरी प्राथमिकता के आधार पर पुनर्वितरित किया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक कोई उम्मीदवार बहुमत प्राप्त नहीं कर लेता।
एनडीए का दमखम
vice president
एनडीए को अपनी संख्यात्मक ताकत पर भरोसा है। गठबंधन के पास अनुमानित 422 सांसदों का समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े 392 से काफी अधिक है। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने दावा किया है कि उनके उम्मीदवार को कम से कम 437 वोट मिलेंगे, जो कुल वैध वोटों का लगभग 56% है। एनडीए ने अपने सांसदों को एकजुट रखने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। प्रत्येक सांसद समूह के लिए वरिष्ठ मंत्रियों को प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो मतदान से पहले सांसदों को एकत्र करेंगे और संगठित रूप से वोटिंग सुनिश्चित करेंगे।
इंडिया ब्लॉक की रणनीति
विपक्षी इंडिया ब्लॉक, जिसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, और अन्य दल शामिल हैं, ने अपनी एकता दिखाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। सोमवार को विपक्षी नेताओं ने संविधान सदन में एक बैठक की, जिसमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, और शरद पवार जैसे प्रमुख नेता शामिल थे। इस बैठक में मॉक मतदान का आयोजन किया गया ताकि वोटों की वैधता सुनिश्चित हो।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दावा किया कि यदि सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें, तो इंडिया ब्लॉक की जीत सुनिश्चित है। हालांकि, विपक्ष के पास अनुमानित 355 सांसदों का समर्थन है, जो बहुमत से कम है। फिर भी, विपक्ष क्रॉस वोटिंग की संभावना पर भरोसा कर रहा है, जैसा कि 2022 के उपराष्ट्रपति vice president चुनाव में देखा गया था, जब जगदीप धनखड़ को वाईएसआर कांग्रेस और बीजद जैसे दलों का समर्थन मिला था।
अनिर्णित वोटों की भूमिका
कुछ क्षेत्रीय दल, जैसे बीजू जनता दल (बीजद) और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), ने इस बार मतदान से दूरी बनाने का फैसला किया है। बीजद ने कहा कि वह एनडीए और इंडिया ब्लॉक दोनों से समान दूरी बनाए रखेगा, जबकि बीआरएस ने भी तटस्थ रहने का निर्णय लिया है। इसके बावजूद, 133 सांसदों के वोट अभी भी अनिर्णित माने जा रहे हैं, जो इस चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। vice president
दक्षिण भारत का दबदबा
इस चुनाव की एक खास बात यह है कि दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं। राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं, जबकि रेड्डी तेलंगाना से। यह दक्षिण भारतीय राजनीति के बढ़ते राष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने रेड्डी की उम्मीदवारी की सराहना की और इसे लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक कदम बताया। vice president
राजनीतिक और वैचारिक टकराव
vice president यह चुनाव केवल एक पद के लिए नहीं, बल्कि एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच वैचारिक टकराव का भी प्रतीक है। एनडीए राधाकृष्णन के अनुभव और संगठनात्मक ताकत पर जोर दे रहा है, जबकि इंडिया ब्लॉक रेड्डी को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का रक्षक बता रहा है। यह मुकाबला दोनों गठबंधनों के लिए अपनी ताकत और एकता को प्रदर्शित करने का अवसर है।
vice president का मतदान न केवल देश के अगले उपराष्ट्रपति vice president का चयन करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि संसद के ऊपरी सदन, राज्यसभा, की कार्यवाही को कौन दिशा देगा। एनडीए की संख्यात्मक बढ़त के बावजूद, विपक्ष की एकता और क्रॉस वोटिंग की संभावना इस चुनाव को रोमांचक बनाती है। पूरे देश की नजर इस बात पर है कि क्या सीपी राधाकृष्णन एनडीए की उम्मीदों को पूरा करेंगे, या बी. सुदर्शन रेड्डी इंडिया ब्लॉक की एकता को जीत में बदल पाएंगे।
