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उज्जैन सिंहस्थ 2028: किसानों के भारी विरोध के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने लैंड पूलिंग योजना रद्द की

उज्जैन

उज्जैन सिंहस्थ 2028

18 नवंबर 2025
मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के लिए प्रस्तावित लैंड पूलिंग योजना को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। यह फैसला सोमवार (17 नवंबर) को मुख्यमंत्री निवास समन्वय में भारतीय किसान संघ (बीकेएस), भाजपा पदाधिकारियों, उज्जैन के जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद लिया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा कि किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि सिंहस्थ का आयोजन भव्य, दिव्य और विश्वस्तरीय हो सके, लेकिन किसी की आजीविका पर आंच न आए।

योजना रद्द होने की मुख्य वजह: किसानों का लंबा संघर्ष

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– भारतीय किसान संघ पिछले 8 महीनों से अधिक समय से इस योजना का लगातार विरोध कर रहा था। किसानों का आरोप था कि लैंड पूलिंग के नाम पर उनकी उपजाऊ कृषि भूमि स्थायी रूप से छीनी जा रही है, जबकि सिंहस्थ हर 12 साल में मात्र 1-2 महीने के लिए होता है।
– योजना के तहत उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में करीब 2,376-2,378 हेक्टेयर जमीन पूल की जानी थी। इसमें किसानों से 50% जमीन लेकर बदले में विकसित प्लॉट दिए जाने का प्रावधान था, लेकिन किसान इसे अपनी कृषि-आधारित आजीविका के लिए घातक बता रहे थे।

– किसानों ने चेतावनी दी थी कि यदि 18 नवंबर तक योजना रद्द नहीं हुई तो हजारों की संख्या में उज्जैन कलेक्टर कार्यालय पर ‘डेरा डालो-घेरा डालो’ आंदोलन शुरू करेंगे। इससे मालवा-निमाड़ क्षेत्र में बड़ा असंतोष फैल सकता था।
– पहले भी किसानों ने ट्रैक्टर रैलियां, चक्काजाम और शिप्रा नदी में पानी में खड़े होकर प्रदर्शन किए थे। संघ से जुड़े होने के कारण यह विरोध भाजपा सरकार के लिए आंतरिक चुनौती बन गया था।

मुख्यमंत्री का बयान: “विश्व देखेगा सिंहस्थ का वैभव”

बैठक के बाद सीएम मोहन यादव ने कहा:
– “साधु-संतों, किसानों और स्थानीय निवासियों की भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। लैंड पूलिंग निरस्त कर हमने किसानों की चिंताओं को दूर किया है।”
– “सिंहस्थ 2028 अब पहले की तरह अस्थायी व्यवस्था से आयोजित होगा। किसानों से सिंहस्थ अवधि के लिए भूमि ली जाएगी और उचित मुआवजा दिया जाएगा।”
– “यह सिंहस्थ अब तक का सबसे भव्य आयोजन होगा। दुनिया इसका वैभव देखेगी। विकास कार्य जारी रहेंगे, लेकिन किसी को परेशान नहीं किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने नगरीय विकास विभाग और उज्जैन जिला प्रशासन को तुरंत अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए।

किसान संघ का स्वागत और आभार

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भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, महेश चौधरी, अतुल माहेश्वरी सहित अन्य पदाधिकारियों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा:
– “यह किसानों की बड़ी जीत है। 8 महीने के संघर्ष के बाद सरकार ने हमारी पीड़ा समझी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार।”
– संघ ने अपना प्रस्तावित आंदोलन स्थगित कर दिया।

अब सिंहस्थ की तैयारी कैसे होगी?

– पहले की तरह अस्थायी कुंभ नगरी बनेगी। स्थायी निर्माण (सड़कें, आश्रम, ड्रेनेज आदि) का प्लान टल गया।
– अनुमान है कि 2028 सिंहस्थ में 12 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आएंगे, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जाएंगी।
– सरकार ने कहा कि साधु-संतों और अखाड़ों से भी चर्चा कर नई योजना बनाई जाएगी।

पृष्ठभूमि: योजना क्यों लाई गई थी?

– सिंहस्थ हर 12 साल में उज्जैन में होता है (अगला 2028 में)।
– हर बार अस्थायी निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, इसलिए हरिद्वार-पटना की तर्ज पर स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का विचार था।
– करीब 2000 करोड़ रुपए की यह महत्वाकांक्षी योजना थी, लेकिन किसानों के विरोध और केंद्रीय नेतृत्व की नाराजगी के चलते वापस लेनी पड़ी।

यह फैसला मध्य प्रदेश में किसान हितों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सिंहस्थ की तैयारियां अब नए सिरे से शुरू होंगी, लेकिन किसानों की जमीन सुरक्षित रहेगी।

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