Thakur Rohit Jadoun ठाकुर रोहित जादौन और यूपी विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की जंग
लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव को बहाल करने की मुहिम अब एक व्यक्तिगत सक्रियता से आगे बढ़कर संगठित आंदोलन का रूप ले रही है, जिसका नेतृत्व युवा नेता Thakur Rohit Jadoun (ठाकुर रोहित जादौन) कर रहे हैं। जादौन न केवल इस मांग को उठा रहे हैं, बल्कि विभिन्न छात्र धड़ों को एक मंच पर लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
छात्र संघ चुनाव की बहाली: Thakur Rohit Jadoun का मुख्य एजेंडा
ठाकुर रोहित जादौन की सक्रियता का मुख्य केंद्र उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव की तत्काल बहाली है।
जादौन का दावा: “विश्वविद्यालय कैंपस ज्ञान का मंदिर होते हैं, लेकिन बिना छात्र संघ के ये तानाशाही प्रशासन का गढ़ बन चुके हैं। छात्र संघ ही वह आवाज़ है जो छात्रों के हितों, फीस वृद्धि, और अकादमिक भ्रष्टाचार के खिलाफ उठती है।”
वह इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जब शिक्षक संघ और अन्य कर्मचारी संघों के चुनाव नियमित रूप से होते हैं, तो छात्रों को उनके अधिकार से वंचित क्यों रखा जा रहा है।
छात्रों को एकजुट करने की रणनीति
यह आंदोलन केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समन्वय और रणनीति पर आधारित है।
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सर्वदलीय समन्वय: जादौन ने विभिन्न विचारधाराओं के छात्र संगठनों और अन्य निर्दलीय समूहों – को छात्र हितों के नाम पर एक साथ लाने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि इस ‘सर्व-छात्र एकता’ के बिना सरकार पर पर्याप्त दबाव बनाना संभव नहीं है।
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न्यायिक हस्तक्षेप की तैयारी: कई रिपोर्ट्स के अनुसार, जादौन समूह उच्च न्यायालय के उस आदेश को फिर से सक्रिय करने पर विचार कर रहा है जो छात्र संघ चुनाव को लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार कराने की अनुमति देता है।
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सोशल मीडिया अभियान: जमीनी स्तर के आंदोलन के साथ-साथ, सोशल मीडिया पर भी #UPStudentUnionElection जैसे हैशटैग के तहत व्यापक अभियान चलाया जा रहा है ताकि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान दिलाया जा सके।
सरकार पर बढ़ता दबाव
जादौन की लगातार सक्रियता के कारण राज्य सरकार पर इस लंबे समय से लंबित मुद्दे पर विचार करने का दबाव बढ़ रहा है।
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उच्च शिक्षा मंत्री का रुख: अतीत में, उच्च शिक्षा मंत्री ने संकेत दिया था कि विश्वविद्यालयों को लिंगदोह समिति की सिफारिशों का पालन करते हुए चुनाव कराने की स्वतंत्रता है, लेकिन अधिकांश विश्वविद्यालयों ने कानून और व्यवस्था या अकादमिक कैलेंडर में व्यवधान का हवाला देते हुए इस प्रक्रिया को टाल रखा है।
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अकादमिक माहौल बनाम राजनीति: प्रशासन और कुछ हितधारकों का तर्क है कि छात्र संघ चुनाव से हिंसा और राजनीति का प्रवेश कैंपस में होता है, जिससे अकादमिक माहौल बिगड़ता है। हालांकि, जादौन और छात्र समूह इस तर्क को छात्र संघ चुनाव के दमन का बहाना बताते हैं।
भविष्य की योजनाएँ
ठाकुर रोहित जादौन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही चुनाव की तिथि घोषित नहीं की जाती है, तो उनका आंदोलन और उग्र होगा। इसमें प्रदेश के प्रमुख विश्वविद्यालयों – इलाहाबाद, लखनऊ, कानपुर, और आगरा में विशाल छात्र रैलियाँ और उपवास कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।
उनका प्रयास उत्तर प्रदेश की छात्र राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जो युवा नेतृत्व को सामने लाने और कैंपस में छात्र संघ चुनाव बहाली के लिए संघर्षरत है।
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