सोनभद्र खनन हादसा 2025: 5 मजदूरों के शव बरामद, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
17 नवंबर 2025: Sonebhadra सोनभद्र जिले के ओबरा इलाके में बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र की अवैध पत्थर खदान धंसने से हुई दुर्घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया है। शनिवार दोपहर का यह हादसा अवैध खनन की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गया। अब तक 5 मजदूरों के शव निकाले जा चुके हैं, जबकि 10-13 अन्य अभी मलबे में दबे बताए जा रहे हैं। NDRF, SDRF और स्थानीय टीमों का रेस्क्यू कार्य लगातार चल रहा है।
सोनभद्र खनन हादसा कैसे हुआ? (Sonebhadra Mining Accident Details)
– तारीख और समय: 15 नवंबर 2025, दोपहर 2:30 से 3 बजे के बीच।
– स्थान: ओबरा थाना क्षेत्र, बिल्ली-मारकुंडी खनन जोन (कृष्णा माइनिंग वर्क्स की अवैध खदान)।
– कारण: ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग के दौरान पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। मलबा 150 फीट तक फैल गया, खदान की गहराई करीब 400 फीट।
– प्रभाव: 15-18 मजदूर मलबे में फंस गए। खदान में पानी जमा होने से स्थिति जटिल।
– खास बात: हादसा बिरसा मुंडा जयंती पर हुआ, जब CM योगी आदित्यनाथ पास के कार्यक्रम में थे। Sonebhadra जिला प्रशासन ने खनन बंद करने के आदेश दिए थे, लेकिन अवैध काम जारी रहा।
यह Sonebhadra सोनभद्र खनन हादसा 2025 अवैध खनन की गंभीर समस्या को उजागर करता है। मजदूर बिना हेलमेट, मास्क या सुरक्षा गियर के काम कर रहे थे।

बरामद शव और मजदूरों की पहचान (Recovered Bodies in Sonebhadra Accident)
रेस्क्यू टीमों ने 45 घंटे की मशक्कत के बाद निम्न शव बरामद किए:
1. राजू सिंह गौड़ (उम्र 30, पनारी गांव) – कंप्रेसर ऑपरेटर।
2. संतोष यादव – परिवार में पत्नी और दो बच्चे।
3. इंद्रजीत – आदिवासी समुदाय से।
4. राजकुमार – अनुभवी मजदूर।
5. पांचवां शव – पहचान प्रक्रिया जारी।
सभी शव Sonebhadra सोनभद्र जिला अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए रखे गए। परिजन मौके पर इकट्ठा होकर इंतजार कर रहे हैं। एक पीड़ित परिवार ने कहा, “मजबूरी में जोखिम भरा काम करते हैं, कोई सुरक्षा नहीं।”
रेस्क्यू ऑपरेशन अपडेट: NDRF-SDRF की टीमें सक्रिय (Rescue Operation in Sonebhadra Mining Tragedy)
– टीमें: NDRF (70वीं बटालियन, वाराणसी), SDRF (दो यूनिट), CISF, पुलिस और फायर ब्रिगेड – कुल 100+ जवान।
– उपकरण: हाइड्रोलिक क्रेन, JCB, पंपिंग मशीनें पानी निकालने के लिए।
– चुनौतियां: भारी पत्थर, गहरा मलबा और पानी। रात-दिन काम जारी।
– नेतृत्व: SP अभिषेक वर्मा और ADG पीयूष मोरदिया साइट पर मौजूद।
– CM निर्देश: योगी आदित्यनाथ ने तुरंत बचाव तेज करने और मुआवजा देने के आदेश दिए।
रेस्क्यू में देरी से परिवारों में गुस्सा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित ब्लास्टिंग तकनीक अपनाई जाती तो हादसा टल सकता था।
कानूनी कार्रवाई और FIR (Legal Action After Sonebhadra Mine Collapse)
– FIR: ओबरा पुलिस स्टेशन में मालिक मधुसूदन सिंह (पूर्व ब्लॉक प्रमुख), दिलीप केसरी और एक अज्ञात के खिलाफ। धाराएं – IPC 304, 337 और खनन नियम उल्लंघन।
– आरोपी: खदान के 9 पार्टनर, जिनमें स्थानीय नेता शामिल। सभी फरार, गिरफ्तारी टीम गठित।
– जांच: उच्चस्तरीय जांच का आदेश। राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड ने दौरा कर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
– विपक्ष का आरोप: माइनिंग माफिया और सत्ता का गठजोड़।
सोनभद्र में खनन हादसों का इतिहास (History of Mining Accidents in Sonebhadra)
Sonebhadra सोनभद्र को “ऊर्जा राजधानी” कहा जाता है, लेकिन अवैध खनन यहां आम:
– 2023: कोयला खदान हादसा – 4 मौतें।
– 2024: रेत खनन दुर्घटना – 2 मजदूर मारे गए।
– मुख्य कारण: सुरक्षा मानक अनदेखी, पर्यावरण क्षति, माफिया सक्रियता।
ट्रेड यूनियनों की मांग: अनिवार्य सुरक्षा उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट और नियमित ऑडिट।
मुआवजा और आगे की योजना (Compensation for Victims)
– घोषणा: मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये।
– अन्य सहायता: घायलों का इलाज, दाह संस्कार व्यवस्था।
– सुझाव: मजदूरों के लिए बीमा, वैकल्पिक रोजगार और खनन लाइसेंस सख्ती।
यह Sonebhadra सोनभद्र खनन हादसा पूरे भारत में खनन सुरक्षा पर बहस छेड़ रहा है। अवैध गतिविधियां रोकने के लिए ड्रोन सर्विलांस और सैटेलाइट मॉनिटरिंग जरूरी।
अपडेट: 17 नवंबर 2025, दोपहर 12:07 बजे। रेस्क्यू जारी, कोई नई बरामदगी नहीं। अधिक जानकारी के लिए सोनभद्र जिला प्रशासन से संपर्क करें।
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