श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द: विवाद और कार्रवाई की पूरी जानकारी
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने जम्मू-कश्मीर के कटड़ा (रियासी) में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को एमबीबीएस (MBBS) पाठ्यक्रम के लिए दी गई अपनी अनुमति (Letter of Permission) वापस ले ली है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस कॉलेज में मुस्लिम छात्रों के “अत्यधिक प्रवेश” को लेकर काफी विवाद चल रहा था।
श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज : NMC की बड़ी कार्रवाई और मुख्य कारण
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने 6 जनवरी, 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी कर कॉलेज की एमबीबीएस सीटों के लिए दी गई मान्यता को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया।
हालांकि आधिकारिक तौर पर NMC ने इसका मुख्य कारण “बुनियादी सुविधाओं और स्टाफ की भारी कमी” बताया है। 2 जनवरी को किए गए एक औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) में आयोग ने निम्नलिखित कमियां पाईं:
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स्टाफ की कमी: टीचिंग फैकल्टी में 39% और रेजिडेंट डॉक्टरों में 65% की कमी पाई गई।
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मरीजों की कमी: अस्पताल में मरीजों की संख्या (OPD) और बेड ऑक्यूपेंसी (Bed Occupancy) तय मानकों से काफी नीचे थी।
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इंफ्रास्ट्रक्चर: ऑपरेशन थिएटरों की संख्या कम थी और जरूरी लैब सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं।
दाखिले को लेकर उपजा विवाद (Muslim Admission Row)
NMC की इस कार्रवाई के पीछे एक गहरा राजनीतिक और सामाजिक विवाद भी जुड़ा है। कॉलेज के पहले बैच (2025-26) में कुल 50 सीटों के लिए दाखिला हुआ था, जिसकी सूची सामने आने के बाद हंगामा मच गया:
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आंकड़े: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 50 में से 46 छात्र मुस्लिम, 3 हिंदू और 1 सिख छात्र को प्रवेश मिला था।
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विरोध का तर्क: भाजपा समर्थित संगठनों, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि चूंकि यह कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के फंड (जो मुख्य रूप से हिंदू श्रद्धालुओं के दान से आता है) से बना है, इसलिए यहाँ हिंदू छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।
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मांग: हिंदू संगठनों ने इसे “अल्पसंख्यक संस्थान” (Minority Institution) घोषित करने या एडमिशन लिस्ट रद्द कर हिंदुओं के लिए आरक्षण की मांग की थी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर की राजनीति भी गरमा गई:
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला: उन्होंने भाजपा पर शिक्षा के क्षेत्र में सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाया। हालांकि, विवाद बढ़ता देख उन्होंने सुझाव दिया था कि छात्रों को अन्य कॉलेजों में शिफ्ट कर इस विवाद को खत्म किया जाए।
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भाजपा: पार्टी नेताओं ने उपराज्यपाल से मुलाकात कर दाखिला प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की थी। उनका कहना था कि श्राइन बोर्ड की संस्था को उसकी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप काम करना चाहिए।
छात्रों के भविष्य का क्या होगा?
NMC ने यह स्पष्ट किया है कि जिन 50 छात्रों ने इस साल दाखिला लिया है, उनका साल खराब नहीं होने दिया जाएगा:
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इन सभी छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ‘सुपरन्यूमरेरी’ (अतिरिक्त) सीटों पर शिफ्ट किया जाएगा।
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यूनियन टेरिटरी प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन छात्रों का समायोजन (Adjustment) सुनिश्चित करें।
भले ही NMC ने तकनीकी और शैक्षिक कमियों को आधार बनाकर मान्यता रद्द की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले दो महीनों से चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों और “सांप्रदायिक तनाव” की स्थिति ने इस फैसले में बड़ी भूमिका निभाई है। फिलहाल, वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के इस मेडिकल प्रोजेक्ट पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

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