प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आइजोल में

आज मिज़ोरम की राजधानी आइजोल में एक शानदार और ऐतिहासिक सुबह देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में रेल कनेक्टिविटी, हवाई अड्डों के विकास, और कई मेगा परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। यह कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे स्थानीय समयानुसार आइजोल के लेंगपुई हवाई अड्डा परिसर में शुरू हुआ, जहां पीएम का जोशपूर्ण स्वागत हुआ। इस अवसर पर उन्होंने पूर्वोत्तर भारत को आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ जोड़ने का संकल्प दोहराया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मिज़ोरम के लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना, रोजगार के अवसर बढ़ाना, और क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को गति देना है।
रेल और हवाई कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी कदम

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन रहा, जिसे 8,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। यह 51 किलोमीटर लंबी रेल लाइन 48 सुरंगों और 156 पुलों को पार करती है, जो इसकी जटिलता और महत्व को दर्शाती है। इस रेल लाइन से मिज़ोरम का पहला रेल संपर्क सिलचर (असम) से स्थापित हुआ, जो यात्रा के समय को आधा करने और माल ढुलाई को आसान बनाने में मदद करेगा। पीएम मोदी ने इस मौके पर तीन नई एक्सप्रेस ट्रेनों—आइजोल-दिल्ली, आइजोल-कोलकाता, और आइजोल-गुवाहाटी—को हरी झंडी दिखाकर रेल नेटवर्क का विस्तार शुरू किया।
हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए, लेंगपुई हवाई अड्डे के विस्तार और आधुनिकीकरण की परियोजना का शुभारंभ हुआ। इस परियोजना में नया टर्मिनल भवन, 2,400 मीटर रनवे का विस्तार, और उन्नत नेविगेशन सुविधाएं शामिल हैं, जिसकी अनुमानित लागत 1,200 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, चम्फाई और लॉन्ग्तलाई में दो नए हेलीपैड्स का निर्माण शुरू किया गया, जो दुर्गम इलाकों में आपातकालीन सेवाओं और पर्यटन को बढ़ावा देगा।
मेगा विकास परियोजनाओं का शिलान्यास

प्रधानमंत्री ने आइजोल में 9,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जो राज्य के बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- मिज़ोरम शहरी सड़क और जल निकासी परियोजना: 2,800 करोड़ रुपये की लागत से आइजोल और आसपास के शहरों में सड़कों का चौड़ीकरण और जल निकासी तंत्र का आधुनिकीकरण।
- राष्ट्रीय राजमार्ग विकास: 3,500 करोड़ रुपये की लागत से NH-6 और NH-54 पर नए सेक्शन का निर्माण, जो मिज़ोरम को म्यांमार और बांग्लादेश से जोड़ेगा।
- मिज़ोरम इन्फोटेक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट: 1,200 करोड़ रुपये की लागत से आईटी हब और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए नई सुविधाएं।
- बांस और जैविक खेती केंद्र: 800 करोड़ रुपये की योजना से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास।
इन परियोजनाओं से अनुमानित 15,000 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोग लाभान्वित होंगे। पीएम ने कहा, “मिज़ोरम की प्राकृतिक सुंदरता और मेहनती लोग इस क्षेत्र को विकास का केंद्र बना सकते हैं। हमारी सरकार इन संसाधनों को सही दिशा में ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
स्थानीय उत्साह और सांस्कृतिक स्वागत
आइजोल की सड़कों पर सुबह से ही रंग-बिरंगी झंडियों और फूलों से सजावट देखी गई। स्थानीय लोग पारंपरिक पोशाकों—पवण, नगा शॉल, और हाथ से बने गहनों—में पीएम का स्वागत करने के लिए उमड़ पड़े। कार्यक्रम स्थल पर मिज़ोरम की प्रसिद्ध ‘चेरव’ और ‘खुआल’ नृत्यों की प्रस्तुतियां हुईं, जो सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती थीं।
35 वर्षीय शिक्षक लालरामकिमा ने कहा, “रेल और हवाई सुविधाएं हमारे लिए एक सपने के सच होने जैसी हैं। इससे हमारे बच्चे बड़े शहरों में बेहतर शिक्षा और नौकरी के मौके पा सकेंगे।” वहीं, 22 वर्षीय छात्रा वानलालनेी ने उम्मीद जताई कि ये परियोजनाएं पर्यटन को बढ़ाएंगी, जिससे स्थानीय कारीगरों को फायदा होगा। हालांकि, कुछ लोगों ने चिंता जताई कि पहाड़ी इलाकों में इन परियोजनाओं के निर्माण में पर्यावरण को नुकसान न हो।
पूर्वोत्तर के लिए एक नई शुरुआत
पीएम मोदी की यह यात्रा पूर्वोत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है। पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, और मिज़ोरम इस विकास यात्रा का नवीनतम पड़ाव है। पीएम ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है, और अगले दो सालों में असम, अरुणाचल प्रदेश, और त्रिपुरा में भी इसी तरह की परियोजनाएं शुरू होंगी।
वे आज ही रात को एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। मिज़ोरम के इस ऐतिहासिक दिन ने न सिर्फ राज्यवासियों को उत्साहित किया है, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर को एक नई आर्थिक और सामाजिक प्रगति की उम्मीद दी है।
