जयपुर, 25 फरवरी 2025
राजस्थान के बहुचर्चित स्विमिंग पूल वायरल वीडियो मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट ने डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) हीरालाल सैनी की नौकरी में बहाली पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला 20 फरवरी 2025 को सुनाया गया, जिसके बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में छा गया है। करीब साढ़े तीन साल पहले वायरल हुए इस अश्लील वीडियो में DSP सैनी और एक महिला कांस्टेबल स्विमिंग पूल में आपत्तिजनक स्थिति में नजर आए थे, जिसमें महिला कांस्टेबल का 6 साल का बच्चा भी मौजूद था। इस घटना के बाद दोनों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था और उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद जुलाई 2021 में तब शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें DSP हीरालाल सैनी और एक महिला कांस्टेबल स्विमिंग पूल में अश्लील हरकतें करते दिखाई दिए। वीडियो में महिला कांस्टेबल के नाबालिग बेटे की मौजूदगी ने इस मामले को और गंभीर बना दिया। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दोनों को गिरफ्तार किया और विशेष जांच दल (SOG) ने इसकी जाँच शुरू की। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि दोनों के बीच पांच साल से अवैध संबंध थे, जो 2016 में अजमेर में शुरू हुए थे। उस समय सैनी ब्यावर में सर्किल ऑफिसर के पद पर तैनात थे, जबकि महिला कांस्टेबल जयपुर में कार्यरत थी।
वीडियो के वायरल होने के बाद दोनों को 8 सितंबर 2021 को निलंबित कर दिया गया और बाद में अक्टूबर 2021 में राजस्थान सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर की गई थी। सैनी को बाद में राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, और हाल ही में निचली अदालत ने उनकी नौकरी में बहाली का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट का ताज़ा फैसला
निचली अदालत के बहाली के फैसले को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 20 फरवरी 2025 को DSP सैनी की नौकरी में वापसी पर रोक लगा दी। कोर्ट ने इसे अंतरिम आदेश बताया है, और मामले की अगली सुनवाई तक यह लागू रहेगा। इस फैसले ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है, जिसमें नैतिकता, पुलिस सेवा की गरिमा और कानूनी प्रक्रिया जैसे मुद्दे उठ रहे हैं।
लोगों की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच बहस छेड़ दी है। कुछ लोग मानते हैं कि सैनी को दोबारा नौकरी में लेना पुलिस सेवा की साख के खिलाफ होगा, जबकि कुछ का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। इस मामले ने राजस्थान पुलिस के आचरण और अनुशासन पर भी सवाल खड़े किए हैं।
आगे क्या?
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना बाकी है कि क्या सैनी अपनी नौकरी में वापसी कर पाएंगे या यह मामला और लंबा खिंचेगा। तब तक, यह घटना राजस्थान के पुलिस इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज रहने वाली है।
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