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मुगल भारत आने से पहले कहाँ थे?

मुगल भारत आने से पहले कहाँ थे?

मुगल वंश की शुरुआत करने वाला जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर भारत में 1526 में पानीपत के पहले युद्ध के साथ आया, लेकिन उसकी जड़ें कहीं और थीं। बाबर मूल रूप से मध्य एशिया से आया था, और उसका सफर कई देशों से होकर गुजरा। तो, आइए जानें कि भारत आने से पहले मुगल कहाँ रहते थे।


बाबर की जन्मभूमि: फरगना (आधुनिक उज्बेकिस्तान)

बाबर का जन्म 24 फरवरी, 1483 को फरगना घाटी में हुआ था, जो आज के उज्बेकिस्तान का हिस्सा है। यह एक छोटा सा राज्य था, जहाँ उसके पिता उमरशेख मिर्जा शासक थे। 1494 में, जब बाबर सिर्फ 12 साल का था, पिता की मृत्यु के बाद वह फरगना का शासक बना। बाबर अपने पिता की ओर से तैमूर और माता की ओर से चंगेज खान का वंशज था, जिससे उसकी पहचान मध्य एशियाई तुर्क और मंगोल संस्कृति से जुड़ी थी। लेकिन फरगना में उसका शासन ज्यादा दिन नहीं टिका, क्योंकि वहाँ की अस्थिरता और दुश्मनों ने उसे बेदखल कर दिया।


समरकंद की कोशिशें: मध्य एशिया में संघर्ष

फरगना छोड़ने के बाद बाबर ने समरकंद (जो आज भी उज्बेकिस्तान में है) पर कब्जा करने की कोशिश की। समरकंद उस समय मध्य एशिया का एक महत्वपूर्ण शहर था, और बाबर के लिए यह उसकी विरासत का प्रतीक था, क्योंकि यह तैमूर की राजधानी रह चुका था। हालाँकि, उसे यहाँ भी स्थायी सफलता नहीं मिली। बार-बार हार और जीत के बाद, बाबर को समरकंद छोड़ना पड़ा। यह दौर उसके लिए मुश्किलों भरा था, लेकिन उसने हार नहीं मानी।


काबुल: अफगानिस्तान में नया ठिकाना

मध्य एशिया में बार-बार असफल होने के बाद, बाबर ने 1504 में काबुल पर कब्जा किया, जो आज के अफगानिस्तान का हिस्सा है। काबुल उसके लिए एक नया आधार बना। यहाँ से उसने अपनी ताकत बढ़ाई और भारत की ओर नजरें जमाईं। काबुल में रहते हुए उसने अपनी सेना को मजबूत किया और 1526 में भारत पर हमला करने की योजना बनाई। इस तरह, काबुल वह आखिरी पड़ाव था, जहाँ से बाबर ने भारत की ओर कदम बढ़ाया।


भारत में आगमन: पानीपत की जीत

1526 में, बाबर ने पानीपत के पहले युद्ध में दिल्ली सल्तनत के शासक इब्राहिम लोदी को हराया और भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी। लेकिन उसका यह सफर मध्य एशिया से शुरू हुआ था, जो फरगना से समरकंद और फिर काबुल तक गया। इस तरह, भारत आने से पहले मुगल मुख्य रूप से आज के उज्बेकिस्तान (फरगना और समरकंद) और अफगानिस्तान (काबुल) में रहते थे।


मुगलों की जड़ें: मध्य एशियाई संस्कृति

बाबर की मातृभाषा चगताई तुर्की थी, और वह फारसी में भी माहिर था। उसने अपनी आत्मकथा “बाबरनामा” लिखी, जो उसकी मध्य एशियाई पहचान को दर्शाती है। उसके पूर्वजों का तैमूर और चंगेज खान से रिश्ता था, जिससे साफ होता है कि मुगल मध्य एशिया के तुर्क और मंगोल मूल से आए थे। यह क्षेत्र उस समय छोटे-छोटे राज्यों में बँटा था, और बाबर ने इन्हीं इलाकों से अपनी यात्रा शुरू की थी।


निष्कर्ष: मुगल कहाँ से आए?

संक्षेप में कहें तो, मुगल भारत आने से पहले मध्य एशिया में रहते थे, खासकर फरगना (उज्बेकिस्तान) और काबुल (अफगानिस्तान) में। ये वे देश थे, जहाँ बाबर ने अपना शुरुआती जीवन बिताया और अपनी ताकत जुटाई। 1526 में भारत आने से पहले उसका आखिरी ठिकाना काबुल था, जहाँ से उसने दिल्ली की ओर कूच किया और इतिहास रच दिया।

(pics :- credit google and wikipedia)

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