भारत का ‘आयरन डोम’
नई दिल्ली: भारत अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से घोषित मिशन सुदर्शन चक्र के तहत 2026 से लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण शुरू होगा। यह मिशन देश को हवाई और मिसाइल हमलों से बचाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करने का लक्ष्य है, जो 2035 तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।
प्रोजेक्ट कुशा के तहत मिसाइल परीक्षण
मिशन सुदर्शन चक्र का एक अहम हिस्सा प्रोजेक्ट कुशा है, जिसके तहत तीन अलग-अलग रेंज की मिसाइलों—M-1, M-2, और M-3—का विकास और परीक्षण किया जाएगा। ये मिसाइलें क्रमशः 150, 250 और 350 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के विमानों, ड्रोनों, क्रूज मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम होंगी।
- 2026 में M-1 मिसाइल का परीक्षण: यह मिसाइल 150 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के हवाई हमलों को रोकने में सक्षम होगी।
- 2027 में M-2 मिसाइल का परीक्षण: यह 250 किलोमीटर तक के खतरों को निशाना बनाएगी।
- 2028 में M-3 मिसाइल का परीक्षण: यह सबसे शक्तिशाली मिसाइल होगी, जो 350 किलोमीटर तक की रेंज में सटीक निशाना लगाकर दुश्मन के हमलों को नाकाम करेगी।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) इन मिसाइलों को 2028 तक विकसित करने का लक्ष्य है, और 2030 तक इन्हें भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा। यह सिस्टम रूस के S-400 डिफेंस सिस्टम की तरह होगा, लेकिन पूरी तरह स्वदेशी होने के कारण इसकी लागत भी कम होगी।
मिशन सुदर्शन चक्र: भारत का ‘आयरन डोम’
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन को भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह न केवल देश की रक्षा करेगा, बल्कि दुश्मनों पर जवाबी हमला करने में भी सक्षम होगा। यह मिशन इजरायल के ‘आयरन डोम’ और अमेरिका के ‘गोल्डन डोम’ जैसे सिस्टम की तर्ज पर होगा, जो हवाई हमलों से देश के महत्वपूर्ण ठिकानों, जैसे सैन्य अड्डों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखेगा।
हाल ही में 23 अगस्त 2025 को ओडिशा के तट पर किए गए इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS) के सफल परीक्षण ने इस मिशन की दिशा में एक मजबूत शुरुआत की है। इस सिस्टम में शामिल हैं:
- QRSAM (क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल): 30 किलोमीटर तक के हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम।
- VSHORADS: कंधे पर ले जाया जा सकने वाला सिस्टम, जो 6 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के ड्रोनों और विमानों को मार गिरा सकता है।
- DEW (डायरेक्टेड एनर्जी वेपन): लेजर तकनीक से लैस यह हथियार ड्रोनों और मिसाइलों को तेजी से निष्क्रिय कर सकता है।
क्यों है यह मिशन महत्वपूर्ण?
मिशन सुदर्शन चक्र का लक्ष्य भारत को एक मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम प्रदान करना है, जो जमीन, हवा, समुद्र और अंतरिक्ष में फैले सेंसरों के नेटवर्क के साथ काम करेगा। यह सिस्टम न केवल हवाई हमलों को रोकने में सक्षम होगा, बल्कि दुश्मन के हमलों का जवाब देने के लिए भारत की आक्रामक क्षमताओं को भी बढ़ाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने IADWS के सफल परीक्षण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “यह सिस्टम भारत की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करेगा।” वहीं, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि यह सिस्टम न केवल रक्षा करेगा, बल्कि दुश्मनों को नुकसान भी पहुंचाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर से मिली प्रेरणा
मिशन सुदर्शन चक्र की प्रेरणा हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर से मिली है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान और चीन के ड्रोन और मिसाइल हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया था। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना ने S-400 सिस्टम का उपयोग कर 300 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन के विमानों को मार गिराया था।
भारत की बढ़ती मिसाइल ताकत
इस मिशन के तहत भारत अपनी मिसाइल क्षमताओं को और विस्तार देगा। इसमें शामिल हैं:
- प्रलय मिसाइल: 500 किलोमीटर की रेंज वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल।
- ब्रह्मोस मिसाइल: जिसकी रेंज को 450 किलोमीटर से बढ़ाकर 800 किलोमीटर किया जाएगा।
- लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल: 1,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम।
2035 तक भारत का लक्ष्य
मिशन सुदर्शन चक्र के तहत भारत का लक्ष्य 2035 तक एक ऐसी रक्षा प्रणाली विकसित करना है, जो न केवल देश की सीमाओं को सुरक्षित रखे, बल्कि महत्वपूर्ण नागरिक और सैन्य ठिकानों को भी अभेद्य बनाए। यह सिस्टम आधुनिक तकनीकों, जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रडार और लेजर डिफेंस सिस्टम, के साथ मिलकर काम करेगा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन भारत को रणनीतिक रूप से और मजबूत करेगा और क्षेत्रीय शक्तियों, जैसे चीन और पाकिस्तान, के लिए एक कड़ा संदेश होगा।
