मेरठ में हुए सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं, बल्कि टूटे रिश्तों, छिपे विश्वासघात और इंसानी कमजोरियों की है। सौरभ राजपूत, जो एक पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी थे, अपनी पत्नी मुस्कान रस्तोगी के जन्मदिन के लिए 24 फरवरी को लंदन से मेरठ अपने घर लौटे थे। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस घर में वे खुशियां मनाने आए थे, वहां उनकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक अंत इंतजार कर रहा था।
पुलिस की जांच में जो खुलासा हुआ, वो किसी को भी हैरान कर देने वाला था। सौरभ की पत्नी मुस्कान (27) ने ही अपने प्रेमी साहिल शुक्ला (25) के साथ मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी। यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि महीनों की सोची-समझी योजना का नतीजा था। दोनों ने न सिर्फ सौरभ की हत्या की, बल्कि इसके हर कदम को बेहद ठंडे दिमाग से अंजाम दिया—चाकू खरीदने से लेकर नशीली दवाओं का इंतजाम करने और शव को ठिकाने लगाने तक।
सौरभ और मुस्कान की जिंदगी बाहर से देखने में आम लगती थी, लेकिन भीतर कुछ और ही चल रहा था। सौरभ अपने काम के सिलसिले में अक्सर विदेश में रहते थे। इस दौरान मुस्कान की मुलाकात 2019 में एक स्कूल व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए साहिल से दोबारा हुई। पुरानी दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई। सौरभ की गैरमौजूदगी ने उनके रिश्ते को और करीब ला दिया। पुलिस के मुताबिक, साहिल प्रतिबंधित ड्रग्स का इस्तेमाल करता था और मुस्कान को भी इसमें शामिल कर लिया था। शायद यही वह कमजोर कड़ी थी, जिसने दोनों को एक खतरनाक रास्ते पर धकेल दिया।
पिछले नवंबर में मुस्कान ने सौरभ को अपनी जिंदगी से हटाने का फैसला किया। वह साहिल के साथ नई शुरुआत करना चाहती थी। सौरभ को दोनों अपने रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट मानते थे। फरवरी में जब सौरभ भारत लौटने वाले थे, मुस्कान और साहिल ने अपनी योजना को अंतिम रूप दे दिया। मुस्कान ने बाजार से दो बड़े चाकू खरीदे। दुकानदार को उसने कहा कि ये चिकन काटने के लिए हैं। साथ ही, उसने स्थानीय दवा की दुकान से नशीली दवाएं भी जुटाईं।
25 फरवरी को उनकी पहली कोशिश नाकाम रही। सौरभ को नशीला पदार्थ दिया गया, लेकिन वह बेहोश होने की बजाय गहरी नींद में सो गए। फिर 4 मार्च को मौका मिला। मुस्कान ने सौरभ के खाने में फिर से दवा मिलाई। इस बार वह बेहोश हो गए। इसके बाद साहिल और मुस्कान ने मिलकर उनकी चाकू मारकर हत्या कर दी। अपराध को छिपाने के लिए उन्होंने सौरभ के शरीर के टुकड़े कर दिए। हत्या से पहले ही मुस्कान अपनी छह साल की बेटी को उसकी दादी के घर भेज चुकी थी, ताकि कोई शक न हो।
दोनों की योजना थी कि शव के टुकड़ों को किसी सुनसान जगह पर फेंक देंगे, लेकिन आखिरकार उन्होंने इसे एक नीले ड्रम में सीमेंट और रेत के साथ छिपा दिया। पुलिस अधीक्षक आयुष विक्रम सिंह ने बताया, “यह एक सोचा-समझा अपराध था। मुस्कान और साहिल ने हर कदम को बहुत सावधानी से उठाया था।”
यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं है। यह उन रिश्तों की है जो चुपके से खोखले हो जाते हैं। यह उन कमजोर पलों की है, जब इंसान सही-गलत की परवाह छोड़ देता है। सौरभ, जो अपने परिवार के लिए मेहनत कर रहा था, उसे क्या पता था कि उसकी जिंदगी का अंत उसी घर में लिखा जा रहा था, जिसे वह अपना समझता था। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ा, बल्कि समाज के सामने कई सवाल भी खड़े कर दिए—विश्वास, प्यार और नैतिकता के मायने क्या हैं?
Meerut murder case: Saurabh Rajput’s tragic death exposed the dark truth of broken relationships and betrayal
