मॉरीशस के प्रधानमंत्री का भारत दौरा
मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगूलम की हालिया भारत यात्रा (लगभग 3 दिन की) ने न केवल राजनयिक संबंधों को मजबूती दी है, बल्कि भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक, और सामरिक सहयोग को भी नई दिशा प्रदान की है। इस दौरे का विशेष आकर्षण रहा वाराणसी (काशी) का दौरा, जहाँ सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव को गहरा करने पर जोर दिया गया। यह लेख इस दौरे के प्रमुख पहलुओं, जैसे स्थानीय मुद्रा में व्यापार, यूपीआई और रूपे कार्ड का उपयोग, चैगोस द्वीपसमूह समझौता, विशेष आर्थिक पैकेज, और सामरिक सहयोग पर प्रकाश डालता है।
सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव
मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर का दर्शन किया, जो भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का प्रतीक है। मॉरीशस में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है, जो अपनी परंपराओं, भाषा, और त्योहारों के माध्यम से भारत से गहराई से जुड़ी हुई है। यह दौरा न केवल सरकारी स्तर पर, बल्कि लोगों के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ाने वाला रहा। काशी, जो भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का केंद्र है, इस दौरे के लिए एक उपयुक्त स्थान था, जो दोनों देशों के साझा इतिहास और मूल्यों को रेखांकित करता है।
स्थानीय मुद्रा में व्यापार और डिजिटल भुगतान: यूपीआई और रूपे कार्ड
भारत और मॉरीशस ने द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं (भारतीय रुपये और मॉरीशस रुपये) के उपयोग पर सहमति जताई है। यह पहल तीसरे देश की मुद्रा, जैसे अमेरिकी डॉलर, पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, दोनों देशों ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और रूपे कार्ड के उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इन डिजिटल भुगतान प्रणालियों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
- यूपीआई का उपयोग: यूपीआई के माध्यम से त्वरित और कम लागत वाले लेन-देन संभव होंगे, जिससे छोटे व्यापारियों और व्यक्तियों को लाभ होगा। मॉरीशस में यूपीआई की शुरूआत से दोनों देशों के बीच सीमा-पार लेन-देन आसान और सस्ता होगा।
- रूपे कार्ड: भारत के स्वदेशी कार्ड नेटवर्क, रूपे, को मॉरीशस में बढ़ावा देने से डिजिटल भुगतान को और मजबूती मिलेगी। यह न केवल व्यापार को सुगम बनाएगा, बल्कि पर्यटकों और यात्रियों के लिए भी सुविधाजनक होगा।
- कम लागत और जोखिम: स्थानीय मुद्रा और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के उपयोग से मुद्रा परिवर्तन से जुड़े खर्चों और जोखिमों में कमी आएगी।
- आर्थिक साझेदारी: यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार को और सुगम बनाएगा, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों को भी लाभ होगा।
- वैश्विक मॉडल: यह पहल अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकती है, जो अपनी स्थानीय मुद्राओं और डिजिटल भुगतान प्रणालियों में व्यापार को बढ़ावा देना चाहते हैं।
चैगोस द्वीपसमूह: एक ऐतिहासिक समझौता
चैगोस द्वीपसमूह को लेकर मॉरीशस और यूनाइटेड किंगडम के बीच हाल ही में हुए समझौते ने मॉरीशस को इस क्षेत्र की संप्रभुता प्रदान की है। हालांकि, डिएगो गार्सिया जैसे कुछ हिस्सों में सुरक्षा संबंधी अधिकार यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के पास रहेंगे। भारत ने इस समझौते को “ऐतिहासिक जीत” के रूप में स्वागत किया है और मॉरीशस की संप्रभुता के समर्थन में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह समझौता न केवल मॉरीशस की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि भारतीय महासागर क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करता है।
विशेष आर्थिक पैकेज और विकास परियोजनाएँ
भारत ने मॉरीशस के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, जिसकी अनुमानित राशि 680 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। इस पैकेज के तहत कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ शामिल हैं:
- हेलीकॉप्टर आपूर्ति: मॉरीशस की सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए।
- पोर्ट लुईस बंदरगाह का पुनर्विकास: मॉरीशस के व्यापार और समुद्री गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए।
- SSR अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उन्नयन: इसमें एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर का निर्माण शामिल है।
- बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ: मोटरवे M4, रिंग रोड फेज II, और बंदरगाह उपकरणों का विकास।
- स्वास्थ्य और AYUSH में सहयोग: पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए।
- पशु चिकित्सा: पशु स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सहयोग।
ये परियोजनाएँ मॉरीशस के आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करेंगी।
सामरिक और समुद्री सुरक्षा सहयोग
भारत और मॉरीशस ने भारतीय महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और निगरानी को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है। चैगोस मरीन प्रोटेक्टेड एरिया जैसे क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएँगे। भारत ने मॉरीशस को अपनी ‘Neighbourhood First’ नीति और ‘Vision SAGAR’ (Security and Growth for All in the Region) पहल के तहत एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में रेखांकित किया है। यह सहयोग न केवल समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा।
इस दौरे के व्यापक प्रभाव
मॉरीशस के प्रधानमंत्री का यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
- आर्थिक स्वायत्तता: स्थानीय मुद्रा, यूपीआई, और रूपे कार्ड के उपयोग से लेन-देन की लागत और जटिलताएँ कम होंगी, जिससे आर्थिक स्वायत्तता बढ़ेगी।
- वैश्विक कूटनीति: चैगोस समझौते में मॉरीशस की जीत ने उसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत किया है, और भारत का समर्थन इसकी कूटनीतिक विश्वसनीयता को दर्शाता है।
- सांस्कृतिक जुड़ाव: मॉरीशस में भारतीय मूल की आबादी के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को और गहरा करने से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और भाईचारा बढ़ेगा।
- सामरिक महत्व: भारतीय महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए दोनों देशों का सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देगा।
मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगूलम का भारत दौरा, विशेष रूप से काशी में उनका समय, दोनों देशों के बीच गहरे और बहुआयामी संबंधों का प्रतीक है। यूपीआई और रूपे कार्ड के उपयोग ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक नया आयाम जोड़ा है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के लेन-देन को और आसान बनाएगा। यह दौरा न केवल राजनयिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देता है, बल्कि सांस्कृतिक और लोगों के बीच के रिश्तों को भी मजबूत करता है। भारत की ‘Neighbourhood First’ नीति और ‘Vision SAGAR’ के तहत मॉरीशस एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभरा है, और यह दौरा दोनों देशों के साझा भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रखता है।
