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गुजरात एटीएस का बड़ा खुलासा: आईएसआईएस-खुरासान से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश, राइसिन जहर से हमलों की साजिश नाकाम

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गुजरात एटीएस का बड़ा खुलासा

10 नवंबर 2025: गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने एक साहसिक अभियान में आईएसआईएस-खुरासान प्रांत (आईएसकेजीपी) से जुड़े एक खतरनाक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जो देशभर में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों की योजना रच रहे थे। इन हमलों में हथियारों के अलावा अत्यंत घातक रासायनिक जहर ‘राइसिन’ (Ricin) का इस्तेमाल शामिल था, जो कास्टर ऑयल (अरंडी का तेल) से बनाया जाता है। यह साजिश न केवल गुजरात बल्कि दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे संवेदनशील इलाकों को निशाना बना रही थी।

गुजरात एटीएस के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) सुनील जोशी ने रविवार को प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि यह अभियान 7 नवंबर को शुरू हुआ, जब मुख्य आरोपी को गंधीनगर के आदलज के पास हिरासत में लिया गया। पूछताछ के आधार पर बाकी दो सहयोगियों को भी बाणासकांठा जिले से गिरफ्तार किया गया। संदिग्धों को अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए), भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मुख्य आरोपी को 17 नवंबर तक एटीएस हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि अन्य दो को रविवार को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।

संदिग्धों की पहचान

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गिरफ्तार संदिग्धों में एक डॉक्टर शामिल है, जो अपनी उच्च शिक्षा के बावजूद कट्टर विचारधारा की चपेट में आ गया था। मुख्य आरोपी डॉ. अहमद मोहिउद्दीन सईद है, जो तेलंगाना के हैदराबाद का निवासी है। उन्होंने चीन से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है और कथित तौर पर आईएसकेजीपी के हैंडलर अबू खदीजा (या अबू खादिम) के संपर्क में था। सईद आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने और नए सदस्यों की भर्ती करने का काम कर रहा था। पूछताछ में उसने कबूला कि वह कलोल (गंधीनगर) के एक सुनसान इलाके से हथियारों का कन्साइनमेंट लेने आया था।

बाकी दो संदिग्ध अजाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल मोहम्मद सलीम उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। दोनों ने राजस्थान के हनुमानगढ़ से हथियार इकट्ठा किए और इन्हें गंधीनगर के एक कब्रिस्तान में छिपा दिया था। अगर मुख्य आरोपी हथियार न ले पाता, तो ये दोनों उन्हें डिलीवर करने वाले थे। गुजरात एटीएस को इन तीनों पर पिछले एक साल से नजर रखी जा रही थी, और सईद के फोन से डिजिटल सबूतों के आधार पर शेख और सलीम को पकड़ा गया।

साजिश का खुलासा: राइसिन जहर और हथियारों का घातक मिश्रण

गुजरात एटीएस की जांच से पता चला है कि संदिग्ध दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद में संवेदनशील स्थानों का रेकी कर चुके थे। उनकी योजना देशभर में बड़े आतंकी हमले करने की थी, जिसमें रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल प्रमुख था। राइसिन, जो दुनिया के सबसे घातक प्राकृतिक जहरों में से एक है, कास्टर बीन्स से निकाला जाता है। मात्र 500 माइक्रोग्राम मात्रा में यह इंसान को मार सकती है। सईद ने राइसिन बनाने की शुरुआती प्रक्रिया शुरू कर दी थी—उसके पास आवश्यक उपकरण, कच्चा माल और चार लीटर कास्टर ऑयल बरामद हुआ।

हथियारों के मोर्चे पर, संदिग्धों के पास दो ग्लॉक पिस्टल, एक बेरेता पिस्टल और 30 जिंदा कारतूस मिले। ये हथियार पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए भेजे गए थे, जैसा कि अबू खदीजा ने निर्देश दिया था। खदीजा अफगानिस्तान में रहता है और आईएसकेजीपी का प्रमुख सदस्य माना जाता है। वह पाकिस्तान में कई लोगों से संपर्क में है और सीमा पार ड्रोन से हथियार सप्लाई करता है। एटीएस अभी यह जांच कर रही है कि क्या संदिग्ध सीधे आईएसकेजीपी से जुड़े हैं या नहीं। फिलहाल, किसी स्थानीय स्लीपर सेल का सुराग नहीं मिला है, लेकिन केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ समन्वय में अन्य राज्यों में जांच चल रही है।

डीआईजी सुनील जोशी ने कहा, “सईद ने राइसिन बनाने की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी थी। उसके पास केमिकल सिंथेसिस के लिए सामग्री थी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और पूछताछ से पता चला कि वे पिछले एक साल से संवेदनशील स्थानों की रेकी कर रहे थे।” उन्होंने आगे जोड़ा, “हैंडलर पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए हथियार भेजता है। हम स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के हर पहलू की जांच करेंगे।”

जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई

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गुजरात एटीएस ने संदिग्धों के तीन फोन और दो लैपटॉप भी जब्त किए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच चल रही है। हथियारों का स्रोत राजस्थान के हनुमानगढ़ से जुड़ा है, और अबू खदीजा के पाकिस्तान कनेक्शन की गहराई से जांच हो रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि साजिश का मॉडस ऑपरेंडी दोहरी थी: मुख्य आरोपी हथियार लेता या सहयोगी डिलीवर करते। एटीएस का यह अभियान न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है, क्योंकि राइसिन जैसे बायोटॉक्सिन का इस्तेमाल आतंकवाद में नया खतरा पैदा कर रहा है।

यह घटना आईएसआईएस की बढ़ती पैठ को दर्शाती है, जो अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र से भारत को निशाना बना रहा है। एटीएस की तत्परता ने एक बड़ा संकट टाला है, लेकिन जांच एजेंसियां सतर्क हैं कि मॉड्यूल के अन्य सदस्य अभी भी फरार हो सकते हैं। अधिक अपडेट के लिए एटीएस की आधिकारिक बयान का इंतजार है।

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