DMK सरकार का हिंदू आस्था पर निर्मम प्रहार: थिरुपरनकुंद्रम में ‘दीपम’ विवाद से भड़का रोष
मदुरै, तमिलनाडु: कार्तिकई दीपम के पवित्र अवसर पर, थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर हिंदू भक्तों को उनकी सदियों पुरानी ‘दीपम’ जलाने की परंपरा से रोकने के लिए तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सरकार ने न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की। हिंदू संगठनों ने इसे राज्य सरकार की हिंदू विरोधी मानसिकता और आस्था से सीधा खिलवाड़ करार दिया है, जिसने पूरे राज्य में रोष पैदा कर दिया है।
DMK सरकार:आदेश की अवमानना और आस्था का दमन
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने बार-बार यह आदेश दिया कि हिंदू भक्तों को पहाड़ी के शिखर पर स्थित ‘दीपथून’ (पत्थर के दीपक स्तंभ) पर दीप जलाने की अनुमति दी जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दीपम जलाने से किसी अन्य समुदाय के अधिकारों का हनन नहीं होता है।
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डीएमके की हठधर्मिता: हिंदू संगठनों का आरोप है कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार ने इस आदेश को मानने से स्पष्ट इनकार कर दिया। सरकार ने तर्क दिया कि इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ेगी, जबकि हिंदू संगठनों का दावा है कि यह केवल वोट बैंक की राजनीति के तहत किया गया दमनकारी कदम है।
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धारा 144 का दुरुपयोग: दीप जलाने के लिए एकत्र हुए हिंदू कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए, प्रशासन ने पहाड़ी के आसपास धारा 144 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी। पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया, जिससे झड़पें हुईं और कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
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न्यायालय की फटकार: सरकारी अधिकारियों द्वारा आदेश का पालन न करने पर मद्रास उच्च न्यायालय ने गंभीर अवमानना कार्यवाही शुरू की और सरकार की मंशा पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह “लोकतंत्र के लिए खतरा” है।
“हिंदू विरोधी” होने का आरोप
भाजपा और अन्य हिंदू संगठनों ने डीएमके सरकार पर खुले तौर पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया है।
“यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं है, यह तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत और अदालती मर्यादा को रौंदने का प्रयास है। डीएमके की विचारधारा लगातार हिंदुओं को अपमानित करती है और सनातन मान्यताओं को नष्ट करने की कोशिश करती है। राज्य सरकार की नफ़रत आज सबके सामने आ गई है।” – एक वरिष्ठ हिंदू नेता
संगठनों का कहना है कि सरकार की यह कार्रवाई दशकों से चली आ रही हिंदू परंपरा के साथ निर्मम मज़ाक है। एक तरफ न्यायालय हिंदू आस्था की रक्षा के लिए आदेश दे रहा है, वहीं राज्य सरकार उसी आस्था का गला घोंटने पर तुली हुई है।
संघर्ष अब सर्वोच्च न्यायालय में
अपनी विफलताओं को छुपाने और न्यायालय के आदेश को पलटने के लिए, तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
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आगे की लड़ाई: हिंदू संगठन इस कानूनी लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट में भी पूरी ताकत से लड़ेंगे। उन्होंने ऐलान किया है कि थिरुपरनकुंद्रम की दीपम परंपरा हर कीमत पर जारी रहेगी, और वे तमिलनाडु में हिंदू अधिकारों के दमन के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि तमिलनाडु में हिंदुओं को अपनी साधारण धार्मिक प्रथाओं को पूरा करने के लिए भी न्यायपालिका की शरण लेनी पड़ रही है।
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