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सी.पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली: भारत को मिला 15वां उपराष्ट्रपति

सी.पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली

12 सितंबर 2025 का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक यादगार पल लेकर आया। नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में सुबह के शांत और गरिमामय माहौल में चंद्रपुरम पोनुस्वामी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिमंडल के सदस्य, विपक्ष के नेता, सुप्रीम कोर्ट के जज, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल समेत देश की प्रमुख हस्तियाँ मौजूद थीं। यह क्षण न केवल राधाकृष्णन के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का पल था, क्योंकि यह भारतीय लोकतंत्र की निरंतरता और मजबूती का प्रतीक बना।

चंद्रपुरम पोनुस्वामी राधाकृष्णन, जिन्हें लोग प्यार से सी.पी. राधाकृष्णन कहते हैं, का जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। विज्ञान और प्रबंधन की पढ़ाई पूरी करने वाले राधाकृष्णन ने बचपन से ही सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में गहरी रुचि दिखाई। उनकी सादगी और समर्पण ने उन्हें खासकर युवाओं और छात्रों के बीच लोकप्रिय बनाया। यह लोकप्रियता और सामाजिक जुड़ाव ही था, जिसने उन्हें बाद में राजनीति की ओर प्रेरित किया।

राजनीतिक सफर

राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ। उन्होंने दक्षिण भारत में, खासकर तमिलनाडु में, भाजपा के संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1998 और 1999 में वे कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए। सांसद के रूप में उनके कार्यकाल में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रहा। उनकी मेहनत और नीतिगत समझ ने उन्हें एक विश्वसनीय नेता के रूप में स्थापित किया। 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया, और बाद में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे। इन दोनों राज्यों में उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि थी सामाजिक अभियानों को बढ़ावा देना, खासकर शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में।

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025

2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में राधाकृष्णन ने विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को हराकर शानदार जीत हासिल की। कुल 781 मतदाताओं में से 767 ने मतदान किया, और राधाकृष्णन ने 152 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह जीत उनके अनुभव, नेतृत्व और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता का प्रमाण थी।

शपथ ग्रहण समारोह

शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित हुआ, जो लोकतांत्रिक गरिमा और सादगी का अनूठा संगम था। सुबह 10 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन को शपथ दिलाई। समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस पल को और भी खास बना दिया। शपथ लेने के बाद राधाकृष्णन ने हाथ जोड़कर देशवासियों को धन्यवाद दिया और अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा, “लोकतंत्र की मजबूती मेरी पहली प्राथमिकता है। मैं राज्यसभा को संवाद और सहमति का मंच बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूँ।” उनके इस कथन ने उनकी स्पष्ट सोच और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाया।

इस शपथ ग्रहण के बाद देशभर से प्रतिक्रियाएँ आईं। सत्तापक्ष के नेताओं, खासकर भाजपा और एनडीए के सदस्यों ने इसे अनुभव और ईमानदारी की जीत बताया। विपक्ष ने भी अपनी शुभकामनाएँ दीं और उम्मीद जताई कि राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति के रूप में निष्पक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएँगे। सोशल मीडिया पर जनता, खासकर युवाओं ने उनकी सादगी और साफ-सुथरी छवि की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने उनके सामाजिक कार्यों और जननेता के रूप में उनकी सक्रियता को याद किया।

सी.पी. राधाकृष्णन का यह नया कार्यकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है। उनकी सादगी, अनुभव और संवाद करने की क्षमता से उम्मीद की जा रही है कि वे न केवल राज्यसभा को और मजबूत करेंगे, बल्कि देश के नागरिकों के बीच विश्वास और सहयोग का माहौल भी बनाएँगे। 12 सितंबर 2025 का यह दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में एक स्वर्णिम पल के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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