Editorial Saga of Bravery

बटुकेश्वर दत्त : भगत सिंह के सच्चे साथी, क्रांति के अनसुने नायक

बटुकेश्वर दत्त

बटुकेश्वर दत्त जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन!

हर साल 18 नवंबर को जब हम बटुकेश्वर दत्त की जयंती मनाते हैं, तो मन अनायास ही उस ऐतिहासिक दिन की ओर चला जाता है – 8 अप्रैल 1929, दिल्ली की सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली। उस दिन दो युवक अंदर घुसे। एक के हाथ में पिस्तौल थी, दूसरे के हाथ में बम। दोनों ने नारे लगाए – “इंकलाब जिंदाबाद!” और फिर बम फट गया। धुआँ छंटा तो दोनों युवक हाथ ऊँचे करके खड़े थे। भागने की कोई कोशिश नहीं। गिरफ्तारी दी और हँसते-हँसते जेल चले गए।

उनमें से एक थे सरदार भगत सिंह। दूसरे थे बटुकेश्वर दत्त।

हम भगत सिंह को तो याद करते हैं, फिल्में बनती हैं, किताबें लिखी जाती हैं। लेकिन बटुकेश्वर दत्त अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं। जबकि सच यह है कि असेंबली बम कांड की पूरी योजना भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने मिलकर बनाई थी। बम भी बटुकेश्वर दत्त ने ही फेंका था। अदालत में पूरा बयान भी मुख्य रूप से बटुकेश्वर दत्त ने ही पढ़ा था।

प्रारंभिक जीवन

बटुकेश्वर दत्त का जन्म 18 नवंबर 1910 को बंगाल के ननिहाल (जिला होशंगाबाद, मध्य प्रदेश के पास) में हुआ था। मूल निवास कानपुर के निकट महसी गांव (जिला उन्नाव) था। बचपन से ही वे पढ़ने-लिखने में तेज थे। कानपुर में ही उन्होंने भगत सिंह से मुलाकात की और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन (बाद में HSRA) से जुड़ गए।

बटुकेश्वर दत्त ने भगत सिंह के साथ मिलकर ८ अप्रैल १९२९ को दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम फेंककर पूरे ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी थी। सबसे खास बात – वे न तो भागे और न ही गोली चलाई। उन्होंने हँसते-हँसते गिरफ्तारी दी और अदालत में अपना ऐतिहासिक बयान पढ़ा: “हमने बम फेंका था, ताकि बहरों को सुनाई दे।”

काला पानी की सजा भुगतने के बाद भी बटुकेश्वर दत्त का जोश कभी कम नहीं हुआ। आजीवन उन्होंने देश की सेवा की और अंत तक क्रांति की ज्वाला जलाए रखी।

यह बयान हिंदी में भी उपलब्ध है, लेकिन मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। नीचे उनका पूरा बयान (हिंदी अनुवाद सहित मुख्य अंश) दिया जा रहा है। यह बयान क्रांतिकारी विचारधारा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

अदालत में बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह का संयुक्त बयान (मुख्य अंश)

बटुकेश्वर दत्त

“हमने बम इसलिए फेंका था ताकि बहरों को सुनाई दे।
हमने कोई हत्या करने की नीयत से बम नहीं फेंका था। हम जानते थे कि असेंबली के उस हिस्से में जहां हमने बम फेंका, वहां कोई नहीं बैठा था। हमने खाली बेंचों की ओर बम फेंका था ताकि किसी की जान न जाए, सिर्फ धमाका हो और ब्रिटिश सरकार की नींद उड़े।

क्रांति मानव जाति का एक अकाट्य अधिकार है।
स्वतंत्रता हर मानव का जन्मसिद्ध अधिकार है।
शोषण और अन्याय के खिलाफ विद्रोह करना कोई अपराध नहीं है।

हम युवा हैं, हमारा खून अभी गर्म है। हम देख रहे हैं कि हमारे देश के लाखों लोग भूखे मर रहे हैं, जबकि अंग्रेजी शासक ऐश कर रहे हैं। हमारे किसान कर्ज में डूबकर आत्महत्या कर रहे हैं। हमारे मजदूर कारखानों में पशुओं से बदतर जिंदगी जी रहे हैं।

हमने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा इसलिए दिया क्योंकि हम मानते हैं कि सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता काफी नहीं है। हमें आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता भी चाहिए। हमें पूंजीवादी शोषण से भी मुक्ति चाहिए।

हम मार्क्स और लेनिन के विचारों से प्रभावित हैं। हम मानते हैं कि मजदूर और किसान ही इस देश की असली ताकत हैं। एक दिन वे उठेंगे और इस शोषण की व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।

हमारी इस कार्रवाई को आप चाहे जितना अपराध कह लें, लेकिन इतिहास हमें अपराधी नहीं मानेगा। इतिहास हमें क्रांतिकारी मानेगा।
हम फांसी के तख्ते पर भी हंसते-हंसते चढ़ेंगे। हमारा बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

हमारे बाद सैकड़ों भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त पैदा होंगे।
इंकलाब जिंदाबाद!
साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!
पूंजीवाद मुर्दाबाद!
क्रांति अमर रहे!”

बयान के अंत में प्रसिद्ध पंक्तियाँ (जो बटुकेश्वर दत्त ने जोर देकर पढ़ीं)

“यदि बहरों को सुनाने के लिए जोर से चिल्लाना पड़े,
तो उसमें कोई बुराई नहीं है।
हमने बम फेंका था – ताकि बहरों को सुनाई दे।”

यह बयान पढ़ते समय दोनों क्रांतिकारियों(बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह) ने अदालत में पूरी निडरता दिखाई। वे हंसते रहे, नारे लगाते रहे और जज को बार-बार टोकते रहे। यह बयान उस समय के सभी अखबारों में छपा और पूरे देश में क्रांति की आग भड़क गई।

आज भी यह बयान पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
ऐसा साहस, ऐसी स्पष्टता और ऐसी निडरता बहुत कम देखने को मिलती है।

ऐसे वीर सपूत को बार-बार सलाम! उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता कितनी कीमती है और उसे बनाए रखने के लिए हर पीढ़ी को सजग रहना पड़ता है।

बटुकेश्वर दत्त अमर रहें!
भगत सिंह अमर रहें!
इंकलाब जिंदाबाद! 🇮🇳

also read:-VARANASI Teaser Launch 2025: Mahesh Babu Ignite a Thunderous Pan-India Blockbuster Storm

follow us:-Pentoday | Facebook

Related posts

दिल्ली की हवा फिर जहरीली: AQI 362 पार, दिवाली के बाद चौथा दिन ‘बहुत खराब’ श्रेणी में

admin

‘शौर्य नमन फाउंडेशन’ का हरित अभियान कारगिल शहीदों के नाम पर वृक्षारोपण: शौर्य और हरियाली का संगम

admin

IPL 2025 नीलामी: विराट कोहली के बाद हार्दिक पांड्या को 18 करोड़ में MI ने खरीदा – मुंबई इंडियंस की स्ट्रॉन्ग रिटेंशन स्ट्रैटेजी

admin

Leave a Comment

Exit mobile version