अफ़ग़ानिस्तान भूकंप
1 सितंबर 2025 को अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी हिस्से, खासकर कुनार और नंगरहार प्रांतों में 6.0 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में 1400 से अधिक लोगों की जान चली गई और 3000 से ज्यादा लोग घायल हो गए। कई गांव मलबे में तब्दील हो गए, और लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। इस संकट की घड़ी में भारत ने तुरंत मानवीय सहायता के लिए कदम उठाया और राहत सामग्री भेजना शुरू किया।
भारत की त्वरित प्रतिक्रिया

भूकंप की खबर मिलते ही भारत सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान के लिए आपातकालीन सहायता भेजने का फैसला किया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत ने काबुल में 1000 परिवारों के लिए टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री भेजी है। इसके अलावा, 21 टन राहत सामग्री हवाई मार्ग से कुनार प्रांत तक पहुंचाई गई। इस सामग्री में शामिल हैं:
- आवश्यक दवाइयाँ: घायलों के इलाज के लिए दवाएँ, ओआरएस घोल, और चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएँ।
- टेंट और स्लीपिंग बैग: बेघर हुए लोगों के लिए अस्थायी आश्रय।
- स्वच्छता किट और हैंड सैनिटाइज़र: स्वच्छता बनाए रखने के लिए।
- पोर्टेबल वाटर प्यूरीफायर और जल शोधन गोलियाँ: पीने के साफ पानी की उपलब्धता।
- कंबल और रसोई के बर्तन: ठंड से बचाव और भोजन की व्यवस्था के लिए।
- व्हीलचेयर और जनरेटर: घायलों की मदद और बिजली आपूर्ति के लिए।
विदेश मंत्री जयशंकर ने अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी से फोन पर बात की और इस आपदा में हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत स्थिति पर नज़र रखे हुए है और आने वाले दिनों में और अधिक राहत सामग्री भेजी जाएगी।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस त्रासदी पर गहरा दुख जताया। उन्होंने X पर लिखा, “अफ़ग़ानिस्तान में भूकंप के कारण हुई जानमाल की हानि से बहुत दुखी हूँ। इस कठिन घड़ी में हमारी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएँ शोकसंतप्त परिवारों के साथ हैं। भारत प्रभावित लोगों को हर संभव मानवीय सहायता और राहत प्रदान करने के लिए तैयार है।”
भूकंप की भयावहता

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, भूकंप का केंद्र जलालाबाद से 27 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में, मात्र 8-10 किलोमीटर की गहराई पर था। कम गहराई के कारण इस भूकंप का प्रभाव और भी विनाशकारी रहा। कुनार प्रांत के चौकाय, नुरगल, शिगल, और मनोगई जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए, जहां कई गांव भूस्खलन की चपेट में आ गए। रविवार रात 11:47 बजे आए इस भूकंप के बाद 4.5 और 5.2 तीव्रता के कई झटके (आफ्टरशॉक) भी महसूस किए गए, जिससे राहत कार्य और चुनौतीपूर्ण हो गए।
राहत कार्यों में चुनौतियाँ
अफ़ग़ानिस्तान की भौगोलिक स्थिति और मौजूदा हालात ने राहत कार्यों को जटिल बना दिया है। भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे दूरदराज के पहाड़ी इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। तालिबान सरकार ने बचाव कार्य शुरू किए हैं, लेकिन सीमित संसाधनों और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण हेलिकॉप्टरों पर निर्भरता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी मदद की पेशकश की है, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान में पहले से चल रहे मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
भारत-अफ़ग़ानिस्तान का दोस्ताना रिश्ता
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने अफ़ग़ानिस्तान की मदद की है। भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी देश के साथ दोस्ती और एकजुटता दिखाई है। इस भूकंप के बाद भारत की त्वरित प्रतिक्रिया ने एक बार फिर यह साबित किया कि आपदा के समय भारत अपने मित्र देशों के साथ मजबूती से खड़ा रहता है। अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी भारत की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है।
अफ़ग़ानिस्तान में राहत और पुनर्वास का काम अभी लंबा है। तालिबान सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिलकर प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने न केवल तात्कालिक राहत सामग्री भेजी है, बल्कि दीर्घकालिक सहायता के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत इस संकट की घड़ी में अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ है और उनकी हर संभव मदद करेगा।”
यह आपदा अफ़ग़ानिस्तान की भूगर्भीय स्थिति और गरीबी की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर करती है। हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला में भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के कारण यह क्षेत्र भूकंपों के लिए बेहद संवेदनशील है। ऐसे में, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकजुटता और सहायता इस संकट से उबरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
