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गाजीपुर का ‘फौजियों का गांव’: वीर सपूतों की जन्मस्थली और मां कामाख्या देवी की कृपा

गाजीपुर, उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक जिला है, जिसे वीर सपूतों की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है। यहां एक ऐसा गांव है, जिसे ‘फौजियों का गांव’ के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है। इस गांव के सैनिकों पर इनकी कुलदेवी, मां कामाख्या देवी की विशेष कृपा मानी जाती है, जिसके कारण आज तक इस गांव का कोई भी जवान किसी युद्ध में शहीद नहीं हुआ।

गाजीपुर जिले के गहमर गांव की पहचान भारतीय सेना के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान के रूप में है। यहां के सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर मां भारती की रक्षा में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहां के वीर सपूतों को परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र जैसे उच्च सम्मान मिल चुके हैं। इस गांव के लोग देश की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

गहमर गांव और मां कामाख्या देवी की कृपा

गहमर गांव की विशेषता यह है कि यहां के निवासी अपनी कुलदेवी, मां कामाख्या की पूजा करते हैं और उन्हें पूरी श्रद्धा से मानते हैं। गांववासियों का विश्वास है कि मां कामाख्या देवी की विशेष कृपा के कारण ही इस गांव के सैनिकों को युद्धों में कोई आघात नहीं पहुंचा।

कहा जाता है कि प्रथम विश्व युद्ध में जब गहमर के 28 सैनिक भाग लेने गए थे, तो उनमें से 21 शहीद हो गए थे। इसके बाद से ही यहां के लोग मानने लगे कि मां कामाख्या देवी अपने सैनिकों की रक्षा करती हैं। इसके बाद से अब तक हुए सभी युद्धों में गहमर गांव के सैनिक शहीद नहीं हुए। चाहे वह 1965 और 1971 की जंग हो, या फिर कारगिल युद्ध, हर बार गहमर के सैनिकों ने वीरता का परिचय दिया, लेकिन कोई भी शहीद नहीं हुआ।

मां कामाख्या की रक्षा के अद्भुत दृश्य

गहमर गांव के पूर्व सैनिक सेवा समिति के अध्यक्ष, मारकंडेय सिंह ने 1971 की जंग के दौरान एक दिलचस्प घटना साझा की। उन्होंने बताया कि जंग के दौरान वे और उनकी टुकड़ी एक बंकर में छिपे हुए थे। रात के समय उन्हें आसमान में सफेद साड़ी पहने हुए एक महिला नजर आई, जो बंकर के आसपास घूम रही थी और कह रही थी, “तुम लोग बेफिक्र होकर जंग लड़ो, तुम्हारा कुछ नहीं होगा।” यह दृश्य गांववासियों के लिए आज भी एक अविस्मरणीय अनुभव है, क्योंकि इसके बाद वे युद्ध में बढ़-चढ़कर शामिल हुए और जीत हासिल की।

मां के आशीर्वाद का महत्व

गहमर गांव के वीर सपूतों और रिटायर सैनिकों की दिनचर्या में मां कामाख्या देवी की पूजा शामिल है। जब भी कोई जवान ड्यूटी से घर लौटता है, तो वह सबसे पहले मां के मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करता है। इसी तरह, जब वह ड्यूटी पर जाता है तो भी मां का आशीर्वाद लेकर ही निकलता है। यह परंपरा गहमर गांव के प्रत्येक सैनिक और उनके परिवारों के लिए एक सम्मान और आस्था का प्रतीक है।

गहमर गांव का यह अद्भुत उदाहरण यह दिखाता है कि जब कुलदेवी की कृपा हो, तो युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी कोई सैनिक शहीद नहीं होता। इस गांव की वीरता और मां कामाख्या देवी की रक्षा, भारतीय सेना के प्रति गांववासियों की गहरी श्रद्धा और समर्पण को दर्शाती है।

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