60% कर्मचारियों की छंटनी: सरकार के पेड गेमिंग प्रतिबंध का असर
भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को हाल ही में एक बड़ा झटका लगा है, जब सरकार ने वित्तीय जोखिमों और युवाओं में नशे की लत को रोकने के लिए पेड गेमिंग पर प्रतिबंध लगा दिया। इस नए कानून के परिणामस्वरूप, बेंगलुरु स्थित गेमिंग प्लेटफॉर्म मोबाइल प्रीमियर लीग (MPL) ने अपने भारत में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती करने का फैसला किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने लगभग 60% स्थानीय कर्मचारियों, यानी करीब 500 में से 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकालेगी। यह कटौती मार्केटिंग, फाइनेंस, ऑपरेशंस, इंजीनियरिंग और लीगल जैसे विभिन्न विभागों में होगी।
भारत सरकार ने अगस्त 2025 में “प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025” को पारित किया, जो ऑनलाइन पेड गेम्स को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है, चाहे वे स्किल-बेस्ड हों या चांस-बेस्ड। इस कानून को लोकसभा ने 20 अगस्त को और राज्यसभा ने 21 अगस्त को मंजूरी दी, और 22 अगस्त को राष्ट्रपति की सहमति के बाद यह कानून बन गया। सरकार का कहना है कि यह कदम युवाओं में गेमिंग की लत और वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए उठाया गया है, जो कई परिवारों के लिए सामाजिक और आर्थिक संकट का कारण बन रहा था।
MPL पर प्रतिबंध का प्रभाव
MPL, जो फैंटसी क्रिकेट, रम्मी और पोकर जैसे पेड गेम्स के लिए जाना जाता था, भारत में अपनी आय का 50% हिस्सा कमाता था, जो पिछले साल लगभग 100 मिलियन डॉलर था। इस प्रतिबंध के कारण कंपनी अब भारत में कोई राजस्व अर्जित नहीं कर पाएगी। MPL के सीईओ साई श्रीनिवास ने कर्मचारियों को भेजे एक आंतरिक ईमेल में इस फैसले को “भारी मन से” लिया गया निर्णय बताया। उन्होंने कहा, “हम प्रभावित कर्मचारियों को इस बदलाव के दौरान हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” हालांकि, कंपनी ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की।
उद्योग पर व्यापक असर
यह प्रतिबंध केवल MPL तक सीमित नहीं है। भारत का ऑनलाइन गेमिंग उद्योग, जो 2029 तक 3.6 बिलियन डॉलर का होने का अनुमान था, इस कानून से गहरे संकट में है। MPL के प्रतिद्वंद्वी ड्रीम11, जिसकी कीमत 8 बिलियन डॉलर है, ने भी अपनी फैंटसी क्रिकेट सेवाएं बंद कर दी हैं। कई अन्य ऐप्स, जो पेड पोकर और रम्मी गेम्स की पेशकश करते थे, ने भी अपनी सेवाएं रोक दी हैं। उद्योग का तर्क है कि ये गेम्स स्किल-बेस्ड हैं और इसलिए इन्हें जुआ नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन सरकार ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
MPL, जिसे पीक XV पार्टनर्स (पूर्व में सिकोइया कैपिटल इंडिया) जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन प्राप्त है और 2021 में इसकी कीमत 2.3 बिलियन डॉलर थी, अब अपने कारोबार को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है। कंपनी अब फ्री-टू-प्ले गेम्स पर ध्यान केंद्रित करेगी और अमेरिका, ब्राजील और यूरोप जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने की योजना बना रही है। हालांकि, भारत में राजस्व के अभाव में यह बदलाव कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
कानूनी चुनौती और अन्य कंपनियों की प्रतिक्रिया
हालांकि एक अन्य गेमिंग कंपनी A23 ने सरकार के इस प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी है, लेकिन MPL और ड्रीम11 ने कानूनी रास्ता अपनाने से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, ड्रीम11 के सीईओ हर्ष जैन ने कहा कि उनकी कंपनी छंटनी नहीं करेगी और मौजूदा प्रतिभाओं के साथ नए उत्पाद विकसित करने पर ध्यान देगी। ड्रीम स्पोर्ट्स, ड्रीम11 की मूल कंपनी, अब “ड्रीम मनी” नामक एक मनी मैनेजमेंट ऐप पर काम कर रही है, जो गोल्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में निवेश की सुविधा प्रदान करेगा।
कर्मचारियों के लिए समर्थन
MPL ने अपने प्रभावित कर्मचारियों को हर संभव सहायता देने का वादा किया है, लेकिन इस बड़े पैमाने पर छंटनी से कई कर्मचारियों के लिए अनिश्चितता का माहौल है। भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में यह पहली ऐसी घटना है, जहां एक बड़े पैमाने पर छंटनी की खबर सामने आई है, और यह उद्योग के भविष्य पर सवाल उठाता है।
भारत सरकार का पेड गेमिंग पर प्रतिबंध न केवल MPL जैसे बड़े खिलाड़ियों के लिए, बल्कि पूरे ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह कदम जहां एक ओर युवाओं और परिवारों को वित्तीय और सामाजिक नुकसान से बचाने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर इसने उद्योग में बड़े पैमाने पर रोजगार और निवेश को प्रभावित किया है। MPL जैसे प्लेटफॉर्म्स अब नए बाजारों और मॉडलों की तलाश में हैं, लेकिन भारत में उनके भविष्य की अनिश्चितता बनी हुई है।
