US America का बड़ा प्रहार: मुस्लिम ब्रदरहुड की तीन प्रमुख शाखाएं ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित, हमास से संबंधों का खुलासा

US America अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मध्य पूर्व के समीकरणों को प्रभावित करने वाले एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने मंगलवार को मुस्लिम ब्रदरहुड (Muslim Brotherhood) की मिस्र, लेबनान और जॉर्डन की शाखाओं को “विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी” (SDGT) के रूप में सूचीबद्ध कर दिया है। अमेरिका ने यह कठोर कदम इस संगठन द्वारा फिलिस्तीनी चरमपंथी समूह हमास को दिए जा रहे सक्रिय समर्थन और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने के आरोपों के बाद उठाया है।
इस फैसले के साथ ही अरब जगत के सबसे पुराने और सबसे प्रभावशाली राजनीतिक-धार्मिक आंदोलनों में से एक पर वैश्विक प्रतिबंधों का शिकंजा कस गया है।
US America वित्त विभाग का कड़ा रुख और आरोप
वाशिंगटन ने इस प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत पिछले साल नवंबर में ही कर दी थी। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (वित्त विभाग) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मुस्लिम ब्रदरहुड की ये तीनों शाखाएं अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को एक ‘वैध नागरिक संगठन’ और ‘सामाजिक कल्याण’ करने वाली संस्था के रूप में प्रस्तुत करती हैं, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है।
ट्रेजरी विभाग के अनुसार, “पर्दे के पीछे ये समूह स्पष्ट और उत्साहपूर्ण तरीके से हमास (Hamas) जैसे आतंकवादी संगठनों का समर्थन करते हैं।” अमेरिका ने इन तीनों शाखाओं पर इजरायल और अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ हिंसक हमलों को बढ़ावा देने, उन्हें वित्तीय मदद पहुँचाने और वैचारिक समर्थन देने का गंभीर आरोप लगाया है।
मिस्र, लेबनान और जॉर्डन: प्रतिबंधों का व्यापक असर
अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली इन तीन शाखाओं में सबसे महत्वपूर्ण मिस्र की शाखा है, जहाँ से इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इसके अलावा, लेबनान की शाखा, जिसे ‘जमात-ए-इस्लामी’ (Jama’a Islamiya) के नाम से जाना जाता है, और जॉर्डन की शाखा को भी वैश्विक आतंकी सूची में डाल दिया गया है।
इन प्रतिबंधों के कारण अब इन संगठनों की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियां फ्रीज (जब्त) कर दी जाएंगी। साथ ही, अमेरिकी नागरिकों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों को इन समूहों के साथ किसी भी प्रकार के लेनदेन से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह कदम इन समूहों की अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
मिस्र का स्वागत और लेबनान का विरोध
इस फैसले पर क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आ रही हैं। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस कदम का पुरजोर स्वागत किया है। काहिरा ने इसे एक “ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम” बताते हुए कहा कि यह इस समूह की चरमपंथी विचारधारा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसके खतरे को स्वीकार करने जैसा है।
दूसरी ओर, लेबनान की शाखा ‘जमात-ए-इस्लामी’ ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। संगठन ने एक बयान जारी कर कहा कि यह अमेरिका का “एकतरफा राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय” है, जिसका लेबनान की आंतरिक कानूनी व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जॉर्डन की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, जहाँ यह संगठन वर्षों से एक प्रमुख राजनीतिक ताकत रहा है।
मुस्लिम ब्रदरहुड का उत्थान और पतन: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
मुस्लिम ब्रदरहुड का इतिहास दशकों पुराना है। 2011 की ‘अरब क्रांति’ के दौरान मिस्र में इस समूह ने भारी लोकप्रियता हासिल की थी। 2012 में मिस्र के पहले स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्रपति चुनाव में इस संगठन के नेता मोहम्मद मुर्सी ने जीत हासिल की थी।
हालांकि, उनकी सत्ता अधिक समय तक नहीं टिक सकी। 2013 में उनके शासन के खिलाफ हुए व्यापक जन-विरोध के बाद मिस्र की सेना ने तख्तापलट कर मुर्सी को सत्ता से हटा दिया। तब से मिस्र की वर्तमान सरकार ने इस संगठन को ‘आतंकवादी समूह’ घोषित कर रखा है और इसके हजारों सदस्यों को जेल में डाल दिया गया है। अमेरिका के इस ताजा फैसले ने मिस्र सरकार के उस रुख को अंतरराष्ट्रीय वैधता प्रदान कर दी है।
US America क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह फैसला मध्य पूर्व में ईरान और हमास के बढ़ते प्रभाव को रोकने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड के बीच वैचारिक समानताएं जगजाहिर हैं। वर्तमान में गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष के बीच, इन शाखाओं पर प्रतिबंध लगाकर अमेरिका यह संदेश देना चाहता है कि हमास को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद देने वाले किसी भी संगठन को बख्शा नहीं जाएगा।
also read:-Thailand में भीषण रेल हादसा: निर्माणाधीन क्रेन गिरने से 22 यात्रियों की मौत
follow us:-Pentoday | Facebook
