जस्टिस सूर्यकांत
28/10/2025 – देश की न्यायपालिका के लिए यह एक महत्वपूर्ण घोषणा है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत नवंबर 2025 में भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में पदभार ग्रहण करने जा रहे हैं। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर उनके नाम की सिफारिश केंद्र सरकार से की है, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह नियुक्ति औपचारिक रूप ले लेगी। जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर, 2025 को CJI का पद संभालेंगे और 9 फरवरी, 2027 तक, यानी करीब सवा साल से अधिक समय तक इस महत्वपूर्ण पद पर रहेंगे।
एक प्रेरणादायक न्यायिक सफर

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के एक छोटे से गाँव पेटवार में हुआ था। उनकी यात्रा एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने की एक असाधारण कहानी है।
- प्रारंभिक जीवन और संघर्ष: उन्होंने अपने शुरुआती जीवन में बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना किया। उन्होंने स्वयं बताया है कि वे और उनके दोस्त गाँव में मंद रोशनी में पढ़ाई किया करते थे, जिसका एकमात्र लक्ष्य सरकारी नौकरी पाना था।
- शिक्षा और वकालत: उन्होंने 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (रोहतक) से एलएलबी पूरी की। उन्होंने हिसार जिला अदालत में अपना करियर शुरू किया और बाद में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस के लिए चंडीगढ़ चले गए।
- सबसे युवा महाधिवक्ता और न्यायाधीश: केवल 38 वर्ष की आयु में, वह हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने। 2004 में, 42 वर्ष की आयु में, उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में उनका प्रमोशन 24 मई, 2019 को हुआ था।
महत्वपूर्ण फैसले और न्यायिक अनुभव

जस्टिस सूर्यकांत ने अपने दो दशकों से अधिक के न्यायिक करियर में कई ऐतिहासिक और संवेदनशील फैसलों का हिस्सा रहे हैं। उनके फैसलों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और लैंगिक समानता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
- राजद्रोह कानून पर रोक: वह उस पीठ का हिस्सा थे जिसने औपनिवेशिक काल के राजद्रोह कानून के उपयोग पर रोक लगा दी थी, जब तक कि सरकार इसकी समीक्षा नहीं कर लेती।
- चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता: उन्होंने निर्वाचन आयोग को बिहार में मतदाता सूची से हटाए गए लाखों नामों का विवरण देने का निर्देश दिया, जो चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को रेखांकित करता है।
- लैंगिक समानता: उन्होंने बार एसोसिएशनों, जिसमें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन भी शामिल है, में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया।
- वन रैंक-वन पेंशन (OROP): उन्होंने रक्षा बलों के लिए OROP योजना को संवैधानिक रूप से वैध मानते हुए उसे बरकरार रखा और सेना में महिला अधिकारियों के स्थायी कमीशन की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी।
नई CJI के सामने चुनौतियां और उम्मीदें

जस्टिस सूर्यकांत के सामने देश की न्यायपालिका को प्रभावित करने वाली कुछ गंभीर चुनौतियां होंगी:
- लंबित मामलों का अंबार: देशभर की निचली अदालतों में 4.7 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय मिलने में अत्यधिक देरी हो रही है।
- न्यायिक रिक्तियां: निचली अदालतों में कुल स्वीकृत पदों में से लगभग 18.6% पद खाली हैं, जिससे लंबित मामलों का संकट और गहरा रहा है।
- न्यायिक सुधार: उन्हें न्यायपालिका में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों को आगे बढ़ाना होगा।
एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने के कारण, जस्टिस सूर्यकांत आम लोगों की न्याय से जुड़ी मुश्किलों को बेहतर ढंग से समझते हैं। उम्मीद है कि अपने कार्यकाल में, वे लंबित मामलों को निपटाने और न्यायिक रिक्तियों को भरने पर विशेष ध्यान देंगे। उनकी नियुक्ति से न्यायपालिका में स्थिरता और निरंतरता आएगी, और उनके व्यापक अनुभव को देखते हुए, देश को उनसे कई महत्वपूर्ण न्यायिक सुधारों की उम्मीद रहेगी।
यह नियुक्ति न केवल जस्टिस सूर्यकांत के व्यक्तिगत समर्पण और मेहनत की जीत है, बल्कि यह न्यायपालिका में योग्यता और वरिष्ठता के सिद्धांत की निरंतरता को भी दर्शाती है, जो भारतीय कानूनी प्रणाली में विश्वास को मजबूत करती है।
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