अयोध्या दीपोत्सव 2025: 26 लाख से अधिक दीयों की ज्योति से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना
अयोध्या, 23 अक्टूबर 2025 – भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या ने दिवाली से ठीक पहले आयोजित दीपोत्सव में इतिहास रच दिया। सरयू नदी के घाटों पर 26,17,215 दीयों को एक साथ प्रज्वलित कर अयोध्या ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दो नई ऊंचाइयों को छुआ। यह भव्य आयोजन न केवल सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाई दे रहा है, बल्कि पर्यटन को भी अभूतपूर्व गति प्रदान कर रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से हुआ यह उत्सव ‘अंधकार पर प्रकाश की विजय’ का जीवंत प्रतीक बन गया।
दीपोत्सव की भव्यता: दो गिनीज रिकॉर्ड कैसे बने?

19 अक्टूबर 2025 को राम की पैड़ी से लेकर गुप्तार घाट तक फैले 56 घाटों पर यह ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ। मुख्य आकर्षण रहा 26,17,215 तेल के दीयों का एक साथ जलना, जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल दीप प्रदर्शन (Largest Display of Oil Lamps in a Single Location) साबित हुआ। पिछले साल के 25,12,585 दीयों के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए इस बार यह संख्या और बढ़ गई। इसके अलावा, 2,128 भक्तों ने एक साथ ‘दीया रोटेशन’ (Diya Rotation) करते हुए सबसे बड़े समन्वित आरती का रिकॉर्ड भी कायम किया।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के आधिकारिक पर्यवेक्षक रिचर्ड स्टेनिंग ने कहा, “आज हमने एक अद्भुत प्रदर्शन देखा। 26,17,215 तेल के दीये – यह आधिकारिक रूप से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है। हर साल यह और भव्य होता जा रहा है। यहां होना सम्मान की बात है… यह वाकई अद्भुत है।” वहीं, दूसरे अधिकारी निशchal बरोट ने उत्साह से कहा, “यह एक भव्य दीपोत्सव था। यह वर्षों तक याद रहेगा। 26,17,215 दीये यहां जलाए गए। यह दुनिया में सबसे अधिक है। हमने इसे गिनीज प्रमाणित कर दिया है। हम बहुत खुश हैं कि यह सफल रहा।”
इस भव्य तैयारी में 30,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने योगदान दिया। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और विभिन्न विभागों के युवा सुबह से ही दीयों को जटिल पैटर्न में सजाने में जुटे रहे। प्रत्येक दीये की स्थिति को क्यूआर कोड से वर्चुअल रूप से सत्यापित किया गया, जबकि ड्रोन और गिनीज अधिकारियों ने वास्तविक समय में निगरानी की। आयोजन के लिए 73,000 लीटर तेल और 55 लाख बातियां इस्तेमाल हुईं, जो पर्यावरण-अनुकूल बायो-ऑयल से बनी थीं। यह प्रयास न केवल रिकॉर्ड तोड़ने का था, बल्कि परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का भी।
राम मंदिर क्षेत्र में सांस्कृतिक उत्साह: ड्रोन शो से रामलीला तक





राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या पहले ही वैश्विक ध्यान का केंद्र बनी हुई है। इस दीपोत्सव ने इसकी चमक को और बढ़ा दिया। सरयू नदी के किनारे राम की पैड़ी पर ड्रोन शो का आयोजन किया गया, जिसमें भगवान हनुमान, श्रीराम, धनुष और रावण के दृश्यों को लेजर लाइट्स के साथ जीवंत किया गया। इसके बाद रामलीला का मंचन हुआ, जो लेजर और लाइट शो से सजा था। यह दृश्य इतना मनमोहक था कि दूर-दराज से आए पर्यटक अभिभूत हो गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को “विश्वास की विजय” का प्रतीक बताया। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या को वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया है। बीबीसी और रॉयटर्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे “विश्वास और एकता का सबसे बड़ा प्रकाश प्रदर्शन” करार दिया, जो लाखों लोगों तक लाइव प्रसारित हुआ। उज्जैन और वाराणसी जैसे अन्य शहरों में भी इसी तरह के इको-फ्रेंडली आयोजन प्रेरणा दे रहे हैं।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को नई गति: अयोध्या का वैश्विक आकर्षण

यह रिकॉर्ड ब्रेकिंग आयोजन अयोध्या के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। राम मंदिर के निर्माण के बाद से ही शहर में पर्यटकों की संख्या में 300 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। दीपोत्सव जैसे उत्सव इसे और मजबूत कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल दिवाली सीजन में अयोध्या में 50 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचने की उम्मीद है। होटल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग को इससे अपार लाभ हो रहा है।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता के साथ आयोजित यह कार्यक्रम रिसाइकलेबल मिट्टी के दीयों और बायो-फ्यूल के इस्तेमाल से खास था। इससे न केवल प्रदूषण कम हुआ, बल्कि स्थानीय कारीगरों को रोजगार भी मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन अयोध्या को ‘वर्ल्ड हेरिटेज सिटी’ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
भविष्य की झलक: दिवाली 2025 में और भव्यता?

दिवाली 2025 अभी बाकी है, लेकिन दीपोत्सव ने पहले ही माहौल गर्म कर दिया है। अगले साल के लिए योजनाएं जोर-शोर से चल रही हैं, जिसमें और अधिक डिजिटल एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी शामिल है। अयोध्या अब न केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक हब बन चुकी है।
यह दीपोत्सव हमें सिखाता है कि परंपरा और नवाचार का संगम ही सच्ची प्रगति है। राम की नगरी की यह रोशनी न केवल सरयू तट को रोशन कर रही है, बल्कि पूरे विश्व को आशा की किरण बिखेर रही है। यदि आप भी इस ज्योति महोत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो अयोध्या की यात्रा अवश्य करें – जहां हर दीया एक कहानी कहता है।
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