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दिल्ली-NCR में यमुना नदी का उफान, बाढ़ जैसे हालात से जनजीवन प्रभावित/yamuna

दिल्ली-NCR में यमुना नदी का उफान/yamuna

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2025: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों (NCR) में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिसके कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। भारी बारिश और हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक निगरानी और राहत कार्य शुरू कर दिए हैं, लेकिन निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।

यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर/yamuna

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, यमुना नदी का जलस्तर 4 सितंबर 2025 को सुबह 8 बजे पुराने रेलवे ब्रिज पर 207.48 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 205.33 मीटर से करीब 2.15 मीटर ऊपर है। 5 सितंबर को दोपहर तक जलस्तर में मामूली कमी आई और यह 207.42 मीटर पर आ गया, लेकिन यह अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर हथिनीकुंड और वजीराबाद बैराज से पानी छोड़ा जाना जारी रहा, तो अगले कुछ दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

प्रभावित क्षेत्र और जनजीवन पर असर

यमुना नदी के उफान ने दिल्ली के निचले इलाकों जैसे यमुना खादर, मयूर विहार फेज-1, यमुना बाजार, कालिंदी कुंज, विश्वकर्मा कॉलोनी, झरोड़ा कलां, और कश्मीरी गेट को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन क्षेत्रों में सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं, और कई घरों में पानी घुस गया है। नोएडा के सेक्टर 125 से 151 और गाजियाबाद के लोनी जैसे इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। फरीदाबाद में यमुना के उफान के कारण दस कॉलोनियां जलमग्न हो गई हैं, जिससे करीब 20,000 लोग प्रभावित हुए हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाढ़ के पानी ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को ठप कर दिया है। यमुना बाजार के एक दुकानदार रोहित कुमार ने बताया, “पर्व का सीजन शुरू होने वाला था, लेकिन बाढ़ ने हमारी कमाई छीन ली। दुकानों में पानी भर गया है, और सामान को बचाने के लिए हमें रात-दिन जद्दोजहद करनी पड़ रही है।” वहीं, मयूर विहार के निवासी आसिफ ने कहा, “मैंने सालों की मेहनत से घर बनाया था, लेकिन अब सब कुछ पानी में डूब गया है। अब हम कहां जाएं?”

प्रशासन का राहत और बचाव कार्य

दिल्ली सरकार और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। निचले इलाकों से करीब 10,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है, जिनमें से 8,018 लोग अस्थायी टेंटों में और 2,030 लोग 13 पक्के शेल्टरों में ठहरे हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पुलिस, और दमकल विभाग की टीमें लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं। मयूर विहार और कालिंदी कुंज जैसे क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों को भोजन, पानी, और अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।

दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश वर्मा ने आईटीओ बैराज का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और कहा, “स्थिति नियंत्रण में है। हम 2023 जैसे हालात को दोबारा नहीं होने देंगे। यमुना बेल्ट पर रहने वाले लोगों को रेस्क्यू कर स्कूलों में बनाए गए कैंपों में भेजा जा रहा है।” दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी गीता कॉलोनी का दौरा कर प्रभावित लोगों से मुलाकात की और राहत कार्यों की समीक्षा की।

यातायात और मेट्रो सेवाओं पर असर

यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर ने दिल्ली और एनसीआर में यातायात को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। पुराने रेलवे ब्रिज, आउटर रिंग रोड, बुलेवर्ड रोड, और महात्मा गांधी मार्ग जैसे प्रमुख मार्गों पर जलभराव के कारण यातायात बंद कर दिया गया है। यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने वाला रास्ता दुर्गम हो गया है, हालांकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने स्पष्ट किया है कि स्टेशन चालू है और इंटरचेंज सुविधा उपलब्ध है।

बाढ़ का कारण और भविष्य की चिंताएं

हथिनीकुंड बैराज से लगातार छोड़ा जा रहा पानी और दिल्ली-NCR में हो रही भारी बारिश बाढ़ की मुख्य वजहें हैं। 3 सितंबर को हथिनीकुंड बैराज से 176,000 क्यूसेक और वजीराबाद बैराज से 93,260 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो दिल्ली पहुंचने में 48 से 50 घंटे लेता है। इसके अलावा, यमुना/yamuna खादर क्षेत्र में अवैध निर्माण ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया है, जिससे पानी शहर की ओर रुख कर रहा है। पर्यावरणविद् डॉ. अनिल गुप्ता ने चेतावनी दी, “यमुना खादर में बसी सात अवैध कॉलोनियां नदी के रास्ते को रोक रही हैं, जिससे बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।”

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक हल्की बारिश की संभावना जताई है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की संभावना नहीं है, जिससे यमुना का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है। फिर भी, नालों को बंद करने और जलभराव की स्थिति के कारण उत्तरी और पश्चिमी दिल्ली के साथ-साथ गुरुग्राम के कुछ क्षेत्रों में समस्याएं बनी हुई हैं।

बीमारियों का खतरा और सामाजिक प्रभाव

बाढ़ के पानी ने न केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ा दी हैं। कई प्रभावित क्षेत्रों में त्वचा और आंखों के संक्रमण के मामले सामने आए हैं। स्थानीय निवासियों ने पीने के पानी की कमी की भी शिकायत की है। यमुना खादर की 11वीं कक्षा की छात्रा अनुराधा ने बताया, “परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन हमारे किताबें और यूनिफॉर्म पानी में बह गए। पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है।”

दिल्ली-NCR में यमुना/yamuna नदी के उफान ने एक बार फिर प्रशासन और निवासियों के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। हालांकि राहत और बचाव कार्य जोरों पर हैं, लेकिन अवैध निर्माण और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है। प्रशासन ने लोगों से नदी के पास न जाने और सतर्क रहने की अपील की है। जैसे-जैसे यमुना का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, उम्मीद है कि स्थिति जल्द सामान्य होगी, लेकिन तब तक प्रभावित लोगों को राहत और सहायता की सख्त जरूरत है।

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